एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017 में कुल 20,000 करोड़ रूपए का लोन छात्रों को दिया गया जिनमें से कुल 10 प्रतिशत छात्रों ने अभी तक ऋण की वापसी नहीं कर पाई है। जबकि ऋण लेने वाले की संख्या में दिनों-दिन इज़ाफा होता जा रहा है।
बैंकों और अन्य उधारदाताओं ने मिलकर लगभग 20,000 रुपए करोड़ का ऋण वितरित किया जो कि वित्तीय वर्ष 2017 में दिया गया था। जबकि पूर्व के वित्तीय वर्ष में 17,000 करोड़ रुपए छात्रों को शिक्षा ऋण के तौर पर प्रदान किये गए थे। हालांकि कुल बकाया बढ़कर 1.6 फीसदी हुआ जो कि 81,600 रुपए है।
क्रेडिट इन्फोर्मेशन कंपनी क्रिफ हाई मार्क ने एक रिपोर्ट में कहा कि प्रणाली के शिक्षा ऋण बुक में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) ने रिपोर्टिंग वर्ष में 21 फीसदी बोनस प्राप्त किया, मार्च 2017 तक 10.2 प्रतिशत की वृद्धि एनपीए अनुपात में दर्ज की गई।
राज्य द्वारा संचालित बैंकों द्वारा मार्केट शेयर का 90 प्रतिशत शेयर किया जाता है जो कि वैल्यू और वाल्यूम दोनों में ही ज्यादा है। हालांकि गैर-बैकिंग उधारदाता ने दस क्षेत्र में 10 लाख से अधिक का फंड रखा है जो कि निम्न परिसंपत्ति की गुणवत्ता के संदर्भ में होता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों में तमिलनाडु और केरल में एनपीए की स्थिति "चिंता" का विषय है, वहीं चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, कोयंबटूर, कांचीपुरम, थिरुवल्लुर, त्रिची, अलापझा, थंजावुर और ईरोड में भी इसे लेकर चिंता जताई जा रही है।
यह ध्यान में रखा जा सकता है कि वर्चुअली, सभी अन्य खंड जो कि रिटेल ऋण में हैं, इनमें से कृषि को छोड़कर सभी को लचकदार माना जाता है और उनकी कॉरपोरेट ऋण पुस्तकों में उच्च एनपीए के चेहरे में बैंक के लिए एक शरण है - जो कि बहुत निम्न एनपीए को दर्शाता है। शिक्षा की लागत में बढ़ोतरी को दर्शाते हुए, औसत टिकट अब 6.8 लाख रुपए तक हो गई है, जोकि पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुनी है जो कि 3.25 लाख रुपए थी। ये तथ्य रिपोर्ट में बताये गए हैं।
त्रण का अधिकतम 65 प्रतिशत 4 लाख रुपए के अंतर्गत आता है जबकि 20 प्रतिशत ऋण, 4 से 10 लाख रुपए के अंतर्गत आता है। शिक्षा के लिए ऋण लेने वाले राज्यों में 6 राज्य; तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हैं, जो कि इन राज्यों की समग्र पुस्तक का 66 प्रतिशत हिस्सा है, जो कि दो साल पहले 70 प्रतिशत कमतर थी। तमिलनाडु अकेला ऐसा राज्य है जो कि 81,600 करोड़ रुपए का पोर्टिफोलियो संगठित करता है, ऐसा कहा गया।
शहर के अनुसार, ब्रेकअप करने पर पता चला कि हैदराबाद, मुम्बई, दिल्ली में 9-10 लाख का औसतन शिक्षा ऋण लिया जाता है वहीं इरनाकुलम, थाणे और विशाखापत्तनम में पिछले 12 महीनों में उच्च वितरण देखा गया। आमतौर पर, टिकट साइज़, प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रथम दो तिमाही में उच्च प्रवृत्ति में पाया गया है, जो विदेशी शिक्षा को पाने के लिए लोगों में उच्च मांग को दर्शाता है।
यह उल्लेखित किया जा सकता है आरबीआई, छात्र ऋणों में खामियों को उजागर कर रहा है और मई 2016 में तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने मुद्दों को झंडी दिखा दी थी। इस संदर्भ में उन्होंने पहले ही कह दिया था कि, ''हमें सावधान रहना होगा कि छात्र ऋण, उनको प्रदान किया जाये जिन्हें इसकी आवश्यकता है और उनके पास इसे चुकाने के लिए साधन हों, ये उन लोगों के लिए माफ़ किये गए हैं जिनका समय खराब था या जो कम दर्जे की सार्वजनिक सेवा में लगे हुए है।''
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