जब आपके बच्चे युवा होने लगें तो अपने बच्चों के नाम पर बचत और निवेश शुरू करना हमेशा बेहतर होता है। नियमित आधार पर एक छोटी सी राशि की बचत के साथ शुरू कर सकते हैं। कोई भी निवेश करने के लिए अनुशासित बचत की आदत बहुत आवश्यक है।
यदि बचत करना मुश्किल है, तो नाबालिग के नाम पर एक अलग से खाता शुरू कर सकते हैं और एक आवर्ती डिपॉजिट शुरू कर सकते हैं। जिससे पैसे की बचत करने में मदद मिलेगी और इसका इस्तेमाल भविष्य में शुल्क भुगतान या कोई भी निवेश करने के लिए किया जा सकता है।
यहां एक अवयस्क बैंक खाते के बारे में जानने योग्य 5 स्मार्ट बातेंः
बैंकों को इस तरह के नाबालिगों के खातों जैसे बचत डिपॉजिट खातों को खोलने के लिए अनुमति दी जाती है जिसमें संरक्षक के रूप में माता होती है। चूंकि अभिभावक को यह राशि निकालने की अनुमति नहीं होती है इसलिए ये हमेशा क्रेडिट में रहते हैं। ताकि उनके खाते में राशि बनी रहे और अनावश्यक चीजों के लिए यह खर्च न हो।
10 वर्ष की आयु से ऊपर वाले नाबालिग अपनी इच्छा से बैंक खाते को खोल तथा संचालित कर सकते हैं। तो वहीं बैंक के पास जोखिम प्रबंधन प्रणालियों पर नज़र रखने के लिए उम्र और राशि के मामले में सीमा तय करने के लिए सभी अधिकार हैं।
आप इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, चैक बुक सुविधा जैसी अतिरिक्त बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। नाबालिग के नाम पर अभिभावाक को चेक बुक जारी की जाएगी।
बालिग होने पर नाबालिग को खाते में शेष राशि की पुष्टि करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खाता वास्तविक अभिभावाक द्वारा ही संचालित किया गया है।
हस्ताक्षर का नवीन नमूना और अन्य निर्देश प्राप्त करने चाहिए और सभी कार्य करने के लिए इन्हें रिकार्ड में रखना चाहिए। ऐसे खाते अपने बच्चे को पैसे का महत्व समझाने और खर्च करने की आदत को नियंत्रण करने के लिए खोला जा सकता है।
नाबालिग के लिए बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए निम्म दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
- जन्म प्रमाण तिथि
- जन्म पंजीकरण प्रमाण पत्र
- जन्म तिथि दर्शाता हुआ रिपोर्ट कार्ड
- फोटो और जन्मतिथि का उल्लेख करता हुआ स्कूल आईडी कार्ड
- अभिभावाक द्वारा हस्ताक्षर किया जाने वाला नाबालिग का घोषणापत्र
- अभिभावाक का फोटो
- खाता खोलने के फार्म पर हस्ताक्षर
- यदि वह वास्तविक अभिभावक नहीं है तो उसे अदालत द्वारा नियुक्त किया जाना चाहिए
बच्चे के अकाउंट को खुलवाने के बच्चे के साथ-साथ माता-पिता के दस्तावेजों की भी जरुरत होती है।
नाबालिग खाते से अर्जित ब्याज आय को अभिभावक की आय के साथ जोड़ा जाएगा और आयकर स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगाया जाता है।
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