क्या आप एक नए नए रेंटल लीज एग्रीमेंट पर साइन कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो आपको यह जान लेना चाहिए कि रेंटल एग्रीमेंट में साइन करने से पहले आपने डॉटेड लाइन में साइन किया है कि नहीं। लीज एग्रीमेंट पर साइन करके आप भविष्य में आने वाली परेशानियों से बच सकते हैं। ऐसे करने से आपके ओनर और आपके बीच एक अच्छा व्यवहारिक रिश्ता भी बन सकता है।
किसी भी रेंटल एग्रीमेंट के पहले आपको यहां पर बताई गई चीजों के बारे में ध्यान से पढ़ना होगा:
पट्टे पर हस्ताक्षर करने से पहले, सुनिश्चित करें कि इसमें कोई अतिरिक्त फीस शामिल नहीं है जैसे कि आवेदन शुल्क, सुविधा शुल्क, सुरक्षा जमा राशि आदि। यदि हां, तो पट्टादाता से पूछिए कि प्रत्येक शुल्क की क्या आवश्यकता है। आप यह पता करिये की इसके लिए भुगतान कैसे करना है और अगर आप शुल्क के बारे में सुनिश्चित नहीं हैं, तो साइन अप करने से पहले पूछिए।
कुछ फ्लैटों और घरों में उपयोगिता बिल जैसे बिजली का बिल और पानी का बिल भी आपके रेंट में शामिल होता है। तो आप जाइये और पट्टेदार या फिर घर के ओनर से उपयोगिता बिल के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त करें।
कुछ लोगों को पालतू जानवर जैसे कि कुत्ते और बिल्लियां अपने साथ रखना पसंद होता है। लेकिन कई ऐसे अपार्टमेंट और सोसाइटी होती हैं जहां पर पेट्स रखने की इजाजत नहीं होती है। तो कई जगह ऐसा भी होता है कि पेट रखने के लिए भी डिपॉजिट जमा करना होता है। इसलिए जब भी आप नए घर के एग्रीमेंट में साइन करें तो इसके बारे में भी पता कर लें।
जांच करें कि क्या आपके पट्टे में एक या अधिक वर्षों के लिए नवीनीकृत करने का विकल्प है या नहीं। यह देखने के लिए जांचे कि क्या कोई वृद्धि दर है? कुछ घरों के मालिक बाद के वर्षों में किराया बढ़ा सकते हैं। नवीकरण नीतियां भवनों के अनुसार अलग-अलग होती हैं। आम तौर पर छोटी इमारतों में अधिक लचीला होता है। किरायेदारों को उस दिनांक की जानकारी अच्छे से होनी चाहिए।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप समय पर किराया नहीं दे पाते हैं। तो अपने ओनर से आप यह भी बात करके रखें कि अगर कभी विपरीत परीस्थितियों के चलते किराया देर से जमा करते हैं तो इस पर कोई पेनाल्टी लगेगी या नहीं। इसके अलावा अन्य पेनाल्टी का भी पता करके रखें।
जब भी आप नए घर में जाने वाले हों तो सबसे पहले आप यह देख लें कि घर में पहले से क्या-क्या मौजूद है। सारी चीजें सहीं हैं या फिर कुछ चीजें टूटी-फूटी हैं। जब आपको इन चीजों के बारे में पूरी जानकारी हो जाए तो फिर उसके बाद पट्टेदार या फिर मकान मालिक से डैमेज के हर्जाने के बारे में पूछ लें कि उसके लिए कब और कितना हर्जाना देना होगा।
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