इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने तेल और प्राकृतिक गैस कार्पोरेशन (ओएनजीसी) से आगे निकल कर भारत की सबसे लाभदायक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी बन गई है। IOC जो कि दशकों से भारत को सबसे ज्‍यादा टर्न ओवर देने वाली बड़ी कंपनी है, ने शुद्ध लाभ में 70 फीसदी बढ़ोत्‍तरी दर्ज करते हुए 31 मार्च 2017 में खत्‍म हुए वित्‍तीय वर्ष में 19,106.40 करोड़ का लाभ दिया है। यह नेट प्रॉफिट ONGC ने जो 2016-17 के वित्‍तीय वर्ष में दर्ज किया था उससे ज्‍यादा है। कंपनियों के कमाई के ब्‍योरे के अनुसार इडियन ऑयल को सबसे अधिक लाभदायक पीएसयू बना दिया गया है।

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रिलायंस इंडस्‍ट्रीज

करोड़पति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लगातार तीसरे साल भी भारत सबसे लाभप्रद कंपनियों में से एक कंपनी बनी हुई है। वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में इनका नेट प्रॉफिट 29,901 करोड़ था।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस एक्‍सपोटर कंपनी है। यह कंपनी 26,357 करोड़ के नेट प्रॉफिट के बाद भारत की दूसरी सबसे लाभप्रद कंपनी है।

सबसे लाभप्रद कंपनी

ओएनजीसी लंबे समय तक भारत की सबसे लाभप्रद कंपनी थी, लेकिन दो साल पहले निजी क्षेत्र की रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुकाबले हार गई थी। अब यह इंडियन ऑयल द्वारा सबसे अधिक लाभदायक पीएसयू के रूप में अबाधित हुआ है।

ओएनजीसी

2015-16 के वित्‍तीय वर्ष में आईओसी ने नेट प्रॉफिट 11,242.23 करोड़ दर्शाया था, तो वहीं ओएनजीसी ने 16, 140 करोड़। जिसमें आईओसी के चेयरमैन बी अशोक ने इन्‍वेंट्री लाभ और परिचालन क्षमता का श्रेय रिफाइनिंग मार्जिन को दियाए तो वहीं ओएनजीसी के चेयरमैन दिनेश के सराफ ने कहा कि कंपनी ने नेट प्रॉफिट का 3,000 करोड़ प्राकृतिक गैस की कीमत नीति के कारण गवा दिये हैं, क्‍योंकि इससे व्‍यापार आर्थिक रुप से अव्‍यावहारिक बना चुका था।

 

 

देश की सबसे बड़ी गैस उत्‍पादक कंपनी

बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने अक्टूबर 2014 में एक नया मूल्य निर्धारण फार्मूला विकसित किया था, जो कि शुद्ध आयातक देश में दरों की दर निर्धारित करने के लिए अमेरिका, कनाडा और रूस जैसी गैस अधिशेष देशों में प्रचलित दरों का उपयोग कर रही है। ओएनजीसी देश का सबसे बड़ा गैस उत्पादक है, जो प्रति दिन 70 मिलियन मानक क्यूबिक मीटर वर्तमान उत्पादन का 80 प्रतिशत है।