इस समय इंडिया में लगभग सभी आईटी कंपनियां जैसे विप्रो, कॉग्निजेंट, इंफोसिस और टीसीएस कर्मचारियों की छटनी करने में लगी हुई हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ आईटी कंपनी में ही छटनी का काम चल रहा है। इंजीनियरिंग, विनिर्माण, ई-कॉमर्स और बैंकिंग क्षेत्र में भी कर्मचारियों को बड़े तादात में निकाला जा रहा है। आजकल जॉब की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है इसलिए यह आवश्यक है कि आप ऐसे कुछ फायनेंशियल प्लान करें जो ऐसे बुरे वक्त में आपके काम आए।
सबसे पहले अपना बजट चेक करें। शॉपिंग मॉल, पेट्रोल, होटल और घूमने-फिरने में हर महीने न जाने कितना आप खर्च कर देते हैं। आपको उसी हिसाब से रहना होगा जिस हिसाब से आपकी सैलरी हो। जब भी आप कुछ करने वाले हों उसके लिए जो खर्च होने वाले हों उसके बारे में पहले से पता कर लें। आप यह पता करें कि आपके पैसे कहां-कहां खर्च हो रहे हैं ऐसे में जो अनावश्यक खर्च होता है उसे रोका जा सकता है। कुछ महीने के लिए आप अपनी लाइफ स्टाइल भी बदल दीजिए जैसे कि बाहर घूमना-फिरना कम कर दीजिए, खाना घर में खाइये और मनोरंजन के साधनों में कुछ दिन लिए रोक लगा दीजिए।
जब भी बाहर शॉपिंग या किसी काम के लिए जायें तो कैश का ही इस्तेमाल करिये क्योंकि डेबिट और क्रेडिट कार्ड में आप वास्तविक खर्च को ट्रैक नहीं कर पाते हैं। जब हम डिजिटल पेमेंट करते हैं तो खर्चों की परवाह भी नहीं करते हैं। लेकिन जब आप कैश देते हैं तो अनावश्यक वस्तुएं खरीदने से बचते हैं।
ऐसा नहीं है कि आपकी जॉब एक बार चली गई है तो दुबारा आपको नहीं मिलेगी। इसलिए जिस वक्त आपकी जॉब चली गई है उस वक्त आपको खर्चे थोड़े कम करने होंगे। खासकर विलासिता के खर्चे क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कुछ महीनों के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा।
जब आपका नकद प्रवाह सूख जाता है, तो कुछ लोग पीएफ निकालने के बारे में भी सोचने लगते हैं। तो यह करना बिल्कुल ही गलत है। पीएफ निकालने से पहले एक बार जरुर सोंचे क्योंकि यह आपकी एक जमा पूंजी है जो कि किसी बहुत बड़ी इमरजेंसी में काम आ सकती है।
जब आपकी जॉब चली जाती है तो आप किसी भी ऐसे लाभ का दावा कर सकते हैं जो आप के लिए हकदार हो सकते हैं, जैसे कि बेराजगार भत्ता। यदि आप अपनी आय के आधार पर लाभ के हकदार हैं, तो हो सकता है कि आप बंधक ब्याज के लिए सरकार के समर्थन के माध्यम से अपने बंधक पर ब्याज का भुगतान करने में सहायता प्राप्त कर सकें।
अगर आपके उपर कोई कर्ज है तो उसे देना बंद न करें। ज्यादातर लोग नौकरी जाने पर अपने कर्ज चुकाना बंद कर देते हैं। लेकिन यह एकदम गलत बात है। आप अपने लाइफ स्टाइल के खर्चों को भले ही कम कर दीजिए लेकिन लोन का कर्ज और दूसरों से ली गई उधारी को कभी देना मत बंद करिये खासकर वह कर्ज जिसमें की ब्याज लग रही हो।
अगर आप किसी चीज की ईएमआई का भुगतान हर महीने कर रहे हैं। पर जॉब के चले जाने से आपको ईएमआई देने और लोन की ब्याज देने में दिक्कत आ रही है तो आप संबंधित बैंक और एजेंसी से बात कर सकते हैं। आपको कुछ महीने के लिए कम ईएमआई देने और या फिर न देने की अनुमति भी मिल जाएगी।
जॉब के चले जाने पर आप तुरंत ही जॉब सर्च करना शुरू कर देते हैं। लेकिन नौकरी मिलने में थोड़ा वक्त लग जाता है। ऐसे समय में आप पैसे कमाने कोई और रास्ता भी सोच कर रखें। अगर आप कोई राइटर और आर्टिस्ट हैं तो फ्रीलांसर का भी काम कर सकते हैं।
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