जब कोई व्‍यक्ति एक नई कंपनी ज्‍वाइन करता है तो उसे उस नई कंपनी की पॉलिसी और नियम-कानून ठीक से नहीं मालूम होते हैं। ऐसे में उस कंपनी का यह फर्ज बनता है कि वह अपने कर्मचारी को वो सारे बेनिफिट दे जो कि उसे मिलना चाहिए। यहां तक कि उसे अपनी कंपनी के रुल्‍स और रेगुलेशन को समझने का कुछ वक्‍त भी देना चाहिए न कि उसके अंजाने पन का फायदा उठाना चाहिए। आपको ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में बताने वाले हैं जो कि नए एंप्‍लाई के तौर पर मिलना चाहिए।

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समय की कोई पाबंदी न हो

किसी भी एंप्‍लाई को समय की डोर में बांध कर नहीं रखना चाहिए। आप उससे जो भी काम करवाना चाहते हैं उसके लिए एक टारगेट फिक्‍स कर दें और उसे समय भी बता दें कि आपको कितने दिन और कितने घंटे में वह काम पूरा चाहिए। इसके बाद ये जिम्‍मेदारी उस पर छोड़ दें कि वह कब आता है और कब जाता है।

सैलरी स्‍ट्रक्‍चर एक समान रखें

अगर एक पोजिशन और प्रोजेक्‍ट के लिए चार लोग काम कर रहे हैं तो चारों लोगों को समान रुप से सैलरी मिलनी चाहिए। इससे एंप्‍लाई के अंदर हीन भावना नहीं आयेगी।

एंप्‍लाई को मिले रिफरल बोनस

सबसे पहली बात आपके एंप्‍लाई को रिफरल सिस्‍टम का अधिकार मिलना चाहिए, क्‍योंकि अगर इम्‍प्‍लाई अपने दोस्‍तों या सहकर्मचारियों को अपनी न्‍यू कंपनी के लिए रिफर करता है तो यह हायरिंग का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत होगा। जो एंप्‍लाई जितने लोगों को रिफर करता है उस हिसाब से उसका बोनस भी बढ़ना चाहिए।

नहीं होना चाहिए भेदभाव

कंपनी के एचआर का यह कर्तव्‍य होना चाहिए कि वो ऑफिस के हर नये पुराने व्‍यक्ति को भेदभाव से संबंधित जानकारी दे कर रखें। लोगों के साथ समानता का भाव रखने की हिदायत दे कर रखना चाहिए। साथ ही एक ऐसी पॉलिसी भी होनी चाहिए कि अगर किसी के साथ भेदभाव हुआ है तो वहां पर जाकर शिकायत भी कर सके।

मैटरनटी और पैटरनटी लीव होनी चाहिए

हर कंपनी को अपने उस एंप्‍लाई का सम्‍मान करना चाहिए जो कि नए पैरेंट्टस बने हों। एक ओर जहां मां को मैटरनटी लीव मिलनी चाहिए तो वहीं दूसरी तरफ पिता को भी पैटरनटी लीव लेने का अधिकार होना चाहिए। चाहे फिर उन्‍होंने बेबी को एडाप्‍ट किया हो तो भी।

एडल्‍ट के लिए ड्रेस कोड पॉलिसी

आपकी कंपनी में जो भी कर्मचारी काम करता है वह एक समझदार युवा होता है उसे सही और गलत का अच्‍छे से ज्ञान होता है। इसलिए उन्‍हें किसी स्‍पेशल ड्रेस कोड के पॉलिसी में ना बांध के रखें बल्कि उन्‍हें एक सिंपल और फॉर्मल ड्रेस ऑफिस टाइम में पहनकर आने की हिदायत दें।

एचआर को देना चाहिए प्रॉपर रिस्‍पांस

आपकी कंपनी में हर एचआर मेंबर को अपने एंप्‍लाई की जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए उन्‍हें दूसरे कर्मचारियों की बातों को ध्‍यान से सुनना चाहिए और उनके काम को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। एचआर को कंपनी के मैनेजर से मीटिंग करनी चाहिए और उन्‍हें यह सलाह देना चाहिए कि उन्‍हें टीम के बाकी सदस्‍यों को भी सुनना चाहिए ताकि एंप्‍लाई का विश्‍वास कंपनी की ओर बढ़े।

सेक्‍सुअल हारसमेंट के खिलाफ बने पॉलिसी

हर कंपनी के अंदर महिलाओं को विशेष सुरक्षा देने के उद्देश्‍य से सेक्‍सुअल हारसमेंट से सबंधित एक पोल बनना चाहिए। जिसमें इससे जुड़ी पॉलिसी और सजा के बारे में विस्‍तार से बताया गया हो। साथ ही नए एंप्‍लाई को इन पॉलिसी से रिलेटेड ट्रेनिंग भी देनी चाहिए।

स्‍कूल जैसे अटेंडेंस जरुरी न हो

अगर कंपनी में एक अच्‍छी कार्यशैली वाला वातावरण बनाना है तो कंपनी में उपस्थिति को लेकर कड़ा रुख नहीं अपनाना चाहिए। अटेंडेंस पॉलिसी किसी भी कंपनी में एक हेल्‍दी कॉओपरेशन का उदाहरण नहीं है। क्‍योंकि कोई भी कर्मचारी स्‍कूल में पढ़ने वाला छोटा बच्‍चा नहीं होता है जिसे समय की पाबंदी का पाठ पढ़ाया जाए।

ओवरटाइम की भी सीमा हो

कुछ कंपनी में ओवरटाइम के नाम पर घंटों काम चलता रहता है। कुछ महीनों तक तो कर्मचारी काम करते हैं लेकिन जब काम सहनशीलता से परे हो जाता है तो वो आखिरकार एंप्‍लाई जॉब छोड़कर चला जाता है जिससे कंपनी की छवि धूमिल होती है।