आपको तो पता ही होगा कि इस बार का बजट अपने आप क्यों खास है। वो इसलिए क्योंकि इस बार दो बजट के बजाय एक ही बजट पेश हो रहा है। रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़ दिया गया है जिससे इस बार एक ही बजट पेश होगा। वहीं ऐसी खबरें हैं कि इस बार के रेल बजट में किराया बढ़ने के संकेत हैं। कहा जा रहा है कि ये बढ़त सीधे तौर पर नहीं होगी बल्कि रेल किराए पर सेफ्टी सेस लगाकर वसूली जा सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि वह रेलवे के बढ़ते घाटे को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाए। इसी सिलसिले में सरकार ने रेल मंत्रालय सेफ्टी फंड के लिए 1 लाख 20 हजार करोड़ की राशि जुटाने के लिए रेल किराए पर सेस लगाने की तैयारी में है। मिली जानकारी के मुताबिक ये सेस राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष में जमा होगा।
रेल बजट 1 फरवरी को पेश होगा। माना जा रहा है कि बजट के दौरान वित्तमंत्री अरुण जेटली रेल किराए में सेफ्टी सेस लगाने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि अभी तक यह नहीं पता चल सका है कि ये सेस कितना फीसदी होगा। आपको बता दें कि कुछ महीने पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वित्तमंत्री से सेफ्टी फंड की पूरी फंडिंग करने की मांग की थी, जिसे वित्तमंत्रालय ने नामंजूर कर दिया था। बताया जा रहा है कि मांगी गई राशि का सिर्फ 25 फीसदी ही मंत्रालय देने के लिए राजी हुआ था।
वहीं रेलवे अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए और भी संसाधनो पर ध्यान दे रहा है। रेलवे मंत्रालय की योजना है कि ट्रेन में अलग अलग डिब्बों को विज्ञापन देने की बजाय सीधे ट्रेन को ही ब्रांड के नाम से चलाया जाए जिससे ट्रेन को एक मुश्त लाभ मिलेगा और बिना किराया बढ़ाए उसका रेवेन्यू का टारगेट पूरा होगा।
इसे ऐसे समझिए जैसे देश में हर साल आईपीएल के मैच होते हैं। पिछले वर्ष मोबाइल फोन कंपनी वीवो इसकी स्पॉन्सर थी वहीं इससे पहले अन्य कंपनियां आईपीएल की स्पॉन्सर थी। इसी तरह से रेलवे अपनी फर्स्ट क्लास ट्रेनों को ब्रांड नेम के साथ जोड़कर चलाएगा। अगर कोई ट्रेन जैसे राजधानी या शताब्दी को सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनी कोकाकोला स्पॉन्सर करती है तो ट्रेन का नाम कोक शताब्दी हो जाएगा। इससे रेलवे को अच्छी खासी आमदनी होगी।
इस प्लान को तेजी पीएम मोदी की हालिया मीटिंग के बाद मिली जिसमें उन्होंने बिना माल भाड़ा बढ़ाए दूसरे तरीकों जैसे विज्ञापन के जरिए रेलवे का रेवन्यू बढ़ाने को कहा। इस तरह की कोशिश पिछले यूपीए सरकार ने की थी लेकिन तब यह प्लान जमीं पर नहीं उतर पाया।
अगले महीने देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है और सरकार नहीं चाहती कि बजट में किराया बढ़ा कर देश के लोगों को नाराज किया जाए। इसलिए ऐसी उम्मीद की जा सकती है कि इस संयुक्त बजट में जिसमें रेल और आम बजट दोनों शामिल हैं उसमें यात्री किराए में शायद ही बढ़ोत्तरी हो। हां इस बजट में रेवले के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर जरूर मुहर लग सकती है।
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