वस्तु एवं सेवाकर (GST) लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। GST के प्रशासन को लेकर गतिरोध समाप्त हो गया। केंद्र अधिकतर छोटे करदाताओं पर नियंत्रण का जिम्मा राज्यों को देने पर सहमत हो गया लेकिन GST को अब एक जुलाई से लागू किया जायेगा।
इससे पहले, GST को एक अप्रैल से लागू किये जाने की योजना थी। GST के तहत करदाताओं का विभाजन दोनों के बीच क्षैतिज रूप से किया जाएगा। डेढ़ करोड़ से कम सालाना कारोबार वाले 90 प्रतिशत करदाता का जिम्मा राज्यों के पास होगा और शेष 10 प्रतिशत केंद्र के दायरे में आएंगे।
केंद्र तथा राज्यों के बीच 1.5 करोड़ रुपए से अधिक सालाना कारोबार वाले करदाताओं का नियंत्रण 50:50 के अनुपात में होगा। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक करदाता का आकलन केवल एक बार किया जाएगा और केवल एक प्राधिकरण करेगा। नियंत्रण छोड़ने के अलावा केंद्र तटवर्ती राज्यों की मांग पर भी सहमत हुआ है। उन्हें 12 समुद्री मील में आर्थिक गतिविधियों पर कर लगाने की अनुमति होगी। हालांकि संवैधानिक रूप से केंद्र का क्षेत्रीय जलक्षेत्र पर नियंत्रण होगा।
बैठक के बाद जेटली ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण प्रगति है।' कर के चार स्लैब दर 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत पर सहमति पहले ही हो गयी है। इसके साथ वस्तु एवं सेवा कर के प्रशासन के मामले में सहमति से इससे जुड़े कानून के मसौदे को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ होगा। GST उत्पाद शुल्क, सेवा कर तथा वैट जैसे केंदीय तथा सेवा कर को समाहित करेगा।
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि समन्वित GST या I-GST के साथ-साथ S-GST तथा C-GST को GST परिषद की 18 फरवरी को अगली बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा। GST या I-GST वह कर है जिसे केंद्र वस्तुओं एवं सेवाओं की अंतर-राज्यीय आवाजाही पर लगाएगा। उन्होंने कहा कि एक बार मंजूरी मिलने के बाद परिषद विभिन्न कर स्लैब में वस्तुओं और सेवाओं पर कर लगाने के बारे में फैसला करेगी।
जेटली ने कहा, ‘GST क्रियान्वित करने की वास्तविक तारीख अब एक जुलाई है जबकि पहले यह एक अप्रैल थी।' उन्होंने कहा कि चूंकि GST एक सौदा कर है, जिसे बिक्री वाले स्थान पर लगाया जाता है, अत: वित्त वर्ष की शुरूआत से क्रियान्वित करने की आवश्यकता नहीं है।
समाचार पोर्टल जी न्यूज ने भाषा समाचार एजेंसी के हवाले से खबर प्रकाशित करते हुए लिख है कि, पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि परिषद की बैठक में उन्होंने असहमति जताई क्योंकि उनकी सरकार डेढ़ करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली 100 प्रतिशत इकाइयों पर राज्यों का नियत्रंण चाहती है। हालांकि, उन्होंने फैसले के मुताबिक 90 प्रतिशत ऐसी इकाइयों को राज्यों के अधिकार क्षेत्र में रखे जाने को छोटे व्यापारियों के हक में राज्यों की जीत बताया।
वहीं, केरल के वित्त मंत्री टी एम थॉमस इसाक ने हालांकि, इससे पहले कहा कि GST व्यवस्था में प्रशासन को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, क्योंकि राज्य करदाताओं पर अपना पूरा नियंत्रण चाहते हैं। थॉमस ने संवाददाताओं से कहा, ‘कोई समझौता नहीं हुआ, हालांकि, विचार विमर्श अभी जारी है। कर प्रशासन किस प्रकार होगा इस पर समझौता नहीं हुआ है।'
हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक की बातचीत में कई अन्य मुद्दों पर सहमति बनी है। एकीकृत GST विधेयक में साझा अधिकार मॉडल पर समझौता हुआ है। राज्यों से लगने वाले समुद्री क्षेत्र में कराधान का अधिकार राज्यों को दिये जाने पर भी सहमति बनी है।
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