500 और 1000 रुपए का नोट बैन होने से जनता थोड़ी परेशान है लेकिन मार्केट के कुछ विशेषज्ञ हैं जो ये बता रहे हैं कि आने वाले वक्त में देश में प्रॉपर्टी के दाम में तेजी से गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक जो लोग घर खरीदने का इंतजार कर रहे हैं उनके लिए आने वक्त में प्रॉपर्टी की दाम लगभग 30 फीसदी तक गिर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक देश में कैश फ्लो बढ़ने से कर्ज का सस्ता होना तय है जिससे होम लोन भी सस्ता होने के पूरे आसार हैं। आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश की GDP में रियल्टी सेक्टर का शेयर 11% है। अक्सर प्रॉपर्टी सौदों में टैक्स बचाने के लिए बड़ा लेनदेन नगद होता है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक तिहाई काला धन सिर्फ प्रॉपर्टी बाजार में है। अब नोटबंदी के बाद से ये नकद मार्केट 20% से 30% नीचे जाना तय है। इसके बाद कैश फ्लो को सुधरने में करीब 6 महीने का वक़्त लग जाएगा।
बता दें कि शुरूआत में इसका रियल स्टेट सेक्टर पर निगेटिव असर पड़ेगा। बता दें कि नोट बैन होने के बाद अब इस सेक्टर में कालाधन खपाने वाले यहां से दूर होने लगेंगे। अनुमान के मुताबिक कालाधन के जरिये इन्वेस्टमेंट के लिए 40% महंगे मकानों की बिक्री होती है। इससे रियलटी सेक्टर में घाटा दूर होगा और मकानों की कीमतें गिरेंगी। इसका असर अभी से शेयर मार्केट पर दिखाई दे रहा है और रियलटी सेक्टर के शेयरों में 20% तक की गिरावट देखी जा रही है। रियल एस्टेट सेक्टर के गिरने के बाद बैंक होम लोन को 8.5 फीसदी तक कर सकते हैं। सरकार भी इस दिशा में कुछ कदम उठा सकती है और डाउन पेमेंट की सीमा को 10-15% से और कम किया जा सकता है।
इसके आलावा कालेधन के जरिए प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले इस सेक्टर से बाहर हो जाएंगे। इससे असली खरीदार और सही धन बाजार में आएगें। अभी बिल्डर्स कीमत लोकेशन के हिसाब से तय करते थे लेकिन नोट बैन के बाद ये सब बदलने वाला है। मार्केट गिरेगा तो आने वाले वक्त में बिल्डर्स की तरफ से भी डिस्काउंट बढ़ाए जाने की उम्मीद की जा रही है।
कालाधन कम होने से स्टांप ड्यूटी की चोरी रुकेगी। हम आपको एक उदाहरण के जरिए बता रहे हैं कि लोग कैसे प्रॉपर्टी की खरीद में कालेधान का निवेश करते हैं। फिलहाल ज्यादातर लोग बिल्डर्स के साथ मिलकर 30 लाख के मकान को 20 लाख का बताकर रजिस्ट्री कराते हैं और बाकी के 10 लाख रुपए कैश में दे देते हैं। जिन्होंने ब्लैक में पैसा देकर कम पैसों की रजिस्ट्री कराई थी अब उनका मकान उसी कीमत में बिकेगा जितने की उसने रजिस्ट्री कराई है। इस तरह से 30 लाख रुपए की रजिस्ट्री की जगह लोग 20 लाख रुपए की ही रजिस्ट्री के पैसे देते थे।
वहीं नगदी की किल्लत से टीवी-फ्रिज आदि की बिक्री घटने की आशंका है। सरकार का मानना है कि एनजीओ ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का बड़ा जरिया हैं इसलिए इन्हीं ओपर एजेंसियों की कड़ी नज़र है। इसके अलावा नकद फीस लेने वाले डॉक्टर और दूसरे प्रोफेशनल्स पर भी रोक लगा दी जाएगी। हालांकि इसके बावजूद भी बेनामी खातों से पैसे वापस आने की संभावना बेहद कम है। इसके बाद खर्चीली शादियां, चुनावों में अनाप-शनाप पैसे बहाने की परंपरा थम सकती है।
धार्मिक कार्य वो इलाका है जहां पर लोग बतौर दान काले धन का इस्तेमाल करते हैं। अब अगर कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों पर बड़ी राशि खर्च करता है या किसी संस्था इत्यादि को दान करता है, तो उसे इसका पूरा हिसाब-किताब देना पड़ेगा। ऐसे में दान-धर्म पर होने वाले खर्चों में कमी तो जरूर आएगी। लेकिन हो सकता है सरकार बजट में धर्मार्थ या समाज के कल्याण के लिए खर्च होने वाली राशि पर टैक्स छूट बढ़ा दे।
भारत के 500 और 1000 के नोटों को अमान्य करने के फैसले का नेपाल में भी व्यापक असर हुआ है। नेपाल की बैंकिंग व्यवस्था ने भारत के 500 और 1000 के नोटों के अमान्य होने के कारण 3.5 करोड़ रुपये की भारतीय मुद्रा को जारी करने से रोक दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता नारायण पोडेल ने कहा, 'हमारे द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंकिंग संस्थाओं ने सूचना दी है कि गुरुवार से उन्होंने 3.5 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित भारतीय मुद्रा को रोक लिया है।'
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