जो मासिक बचत करते है उनके लिए आरडी - रिकरिंग डिपाजिट यानि आवर्ती जमा एक आदर्श बचत जमा योजना है। बिना ज्यादा निवेश किये, छोटी अवधि में किसी महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्य के लिए यह योजना काफी मददगार होती है।
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रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम के तहत बैंक किश्त की राशि, जो पहले निर्धारित होती है वह प्रतिमाह आपके सेविंग अकाउंट से इस स्कीम में ट्रांसफर करता है, जिसके तहत अवधि पूर्ण होने पर प्रिसिंपल अमाउंट के साथ-साथ ब्याज भी देय होता है।
रिकरिंग डिपाजिट के संबंध में छ: छोटी-छोटी बातें जो जानना आवश्यक हैं, यहां दी जा रही है-
न्यूनतम 6 माह और अधिकतम एक सौ बीस माह, इस बचत योजना के लिए निर्धारित की जाती है। बैंक परिपक्ता अवधि के पूर्व ही पेनल्टी के साथ धन निकासी की अनुमति देता है, किन्तु आरडी से परिपक्कता अवधि से पूर्व आंशिक धन निकासी की अनमुति नहीं देता है। कुछ बैंक एनआरआर्इ ग्राहकों के लिए न्यूनतम परिपक्कता अवधि एक वर्ष निर्धारित करता है।
भारत में कोर्इ भी व्यक्ति इस जमा योजना को मासिक किश्त रुपये 10 के गुणक में 100 है, किन्तु अधिकतम की कोर्इ सीमा नहीं है, से प्रारम्भ कर सकता है। एसबीआर्इ और अन्य सरकारी बैंकों में यही प्रावधान है, किन्तु निजी बैंक में न्यूनतम किश्त की राशि 1000 और अधिकतम 14,99,999 प्रति माह निर्धारित की गर्इ है।
सभी भारतीय नागरिक, अविभाजित हिन्दू परिवार, प्राइवेट एण्ड पब्लिक लि. कम्पनियां, ट्रस्ट और सोसाइटिज, आदि।
10,000 रुपये से अधिक ब्याज मिलने पर और ब्याज को पुन: निवेश करने पर टीडीएस की कटौती सभी बैंकों द्वारा की जाती है, परन्तु पोस्ट ऑफिस में जमा रिकरिंग डिपाजिट पर टीडीएस कटौती नहीं की जाती है।
मासिक इन्सटालमेंट एक बार जो निर्धारित हो जाता है, बाद में उसमें परिवर्तन सम्भव नहीं है। ब्याज परिपक्कता अवधि पूर्ण होने पर प्रिंसिंपल अमाउंट के साथ देय होता है। परिपक्ता के पूर्व निकासी पर ब्याज की दर बेस रेट से कम दी जाती है। जिस दिन से जमा योजना प्रारम्भ होती है, उसी दिनांक को जो ब्याज होता है और जो समयावधि निर्धारित होती है, उसी आधार पर देय होता है।
यदि मासिक किश्ते जमा कराने में अनियमितता होती है और निरन्तर छ: माह की अवधि में एक भी किश्त जमा नहीं होती है, तब बैंक को यह अधिकार होता है कि वह आरडी बचत जमा योजना अकाउंट बंद कर दें।
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