आनंद, एक व्‍यवसायी हैं और वह हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। इस बार से आनंद, ऑनलाइन आयकर रिटर्न भरना चाहते हैं ताकि उन्‍हे आसानी हों। लेकिन इस बारे में उन्‍हे ज्‍यादा जानकारी नहीं है और उन्‍हे कुछ बातों के बारे में भी जानना है जैसे- किस प्रकार पुराने ई-रिटर्न फाइल को देख सकते हैं या डिमांड/रिफंड स्थिति को कैसे देखा जाएं आदि।

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आनंद की तरह कई अन्‍य लोग भी ऐसी ही जानकारियों को जानना चाहते होगें; क्‍योंकि हाल ही में केन्‍द्रीय कर प्रत्‍यक्ष बोर्ड ने नियम बना दिया है कि 5 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले निर्धारिती, आयकर रिटर्न के लिए ई-फाईलिंग करें।

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इस तरह के नियम बनाकर सरकार ऑनलाइन टैक्‍स रिटर्न को बढ़ावा देना चाहती है।

अगर आप भी ऑनलाइन आयकर रिटर्न के बारे में अन्‍य जानकारी चाहते हैं तो इसकी सरकारी वेबसाइट पर जाएं और वहां पर आप इन 8 बातों की आसानी से जांच कर सकते हैं:

1. ई-फाईल रिटर्न का इतिहास: वेबसाइट पर लॉगइन करने के बाद आप, ''मेरे खाते'' पर ''ई-फाईल रिटर्न'' पर जाएं। वहां आपको, आपके द्वारा दाखिल किए जाने वाले सभी रिटर्न की पूरी जानकारी, स्थिति और पावती संख्‍या यानि एकनॉलेजमेंट नम्‍बर के साथ मिल जाएगी। पावती संख्‍या पर क्लिक करते ही पूरी जानकारी आपके सामने खुलकर आ जाएगी।

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2. डिमांड/रिफंड स्थिति को देखना: अगर लागू होता है तो खाते में डिमांड/रिफंड को देखने का विकल्‍प दिया जाता है। अगर रिफंड लागू नहीं होता है तो ''नो डिमांड नो रिफंड'' लिखा हुआ दर्शाया जाता है। सिर्फ रिफंड अवेतनीय मामलों के लिए, कारणों को दर्शाया जाएगा।

3. रिफंड रि-इश्‍यू रिक्‍वेस्‍ट की जांच कैसे करें: लॉगइन करने के बाद, आप रिफंड रि-इश्‍यू रिक्‍वेस्‍ट पर जाएं, मूल्‍यांकन वर्ष का चयन करें और सीपीसी रिफरेंस कम्‍यूनिकेशन नम्‍बर को प्रदान करें और सीपीसी ऑर्डर के अनुसार रिफंड सिक्‍वेंस नम्‍बर को डालें। आप, रिफंड इश्‍यू स्‍टेटस रिक्‍वेस्‍ट को भी ट्रेक कर सकते हैं।

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4. सुधार के लिए अनुरोध: लॉगइन करने के बाद ''मॉय एकाउंट'' पर जाएं और रेक्‍टीफिकेशन रिक्‍वेस्‍ट यानि सुधार अनुरोध पर क्लिक करें। मूल्‍यांकन वर्ष का चयन करें और हाालिया कम्‍यूनिकेशन रिफरेंस नम्‍बर दर्ज करें। आप, मूल्‍यांकन वर्ष का चयन करते हुए सुधार स्थिति को भी जांच सकते हैं।

5. सूचना के लिए अनुरोध: धारा 143(1)/154 के तहत सूचना के लिए अनुरोध किया जा सकता है और ई-मेल के द्वारा ताजा जानकारियों को भेजने या जानकारी को पुन: भेजने का अनुरोध किया जा सकता है।

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6. कानूनी वारिस के रूप में पंजीकरण करें: अगर लागू होता है तो आप एकाउंट को लॉगइन करने के बाद,किसी को कानूनी वारिस के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं जो आपका कर भुगतान करने के लिए जिम्‍मेदार होगा या आपके कर लाभों को लेगा।

7. फॉर्म 26 एएस देखें: साइट पर जाकर फॉर्म 26 एएस को देखा जा सकता है, क्‍योंकि वेबसाइट, टीडीएस-सीपीसी वेबसाइट से रिडायरेक्‍ट हो जाती है। फॉर्म 26 एएस में विभिन्‍न स्‍त्रोतों जैसे- टीडीएस के द्वारा कर कटौती के सभी विवरण दिए जाते हैं।

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8. शिकायत निवारण: मेन मेन्‍यू में जाकर हेल्‍प डेस्‍क पर क्लिक करें और आईटीआर-वी की प्रक्रिया, सुधार या संचार से सम्‍बंधित शिकायत को लिख दें।

पोर्टल के माध्‍यम से आप कर सम्‍बंधी कोई भी जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं। याद रहें, टैक्‍स रिटर्न की अंतिम तिथि, 31 अगस्‍त 2015 है, जो कि 31 जुलाई 2015 से बढ़ाकर की गई है।