मुद्रा बैंक के जरिये न केवल उन लोगों को कर्ज मिल सकेगा जिनकी पहुंच बैंकों तक नहीं है साथ ही अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े अधिकतर सूक्ष्म/लघु उद्यमों को निचले स्तर तक कर्ज वितरित किया जा सकेगा।
मुद्रा बैंक के जरिए दलितों और आदिवासी उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिले। उद्योग में अधिकतर कुशल श्रमिक दलित समुदायों से हैं। उनमें अपनी सूक्ष्म इकाइयां शुरू करने की संभावना है बशर्तों उन्हें आसान शर्तों पर कर्ज मिल सके।
हालांकि अधिकतर कौशल प्राप्त हैं और अपने काम की तकनीकी बारीकियों को समझते हैं, लेकिन बहुत कम धन अथवा संपत्ति नहीं होने के कारण उनकी पहुंच वित्तीय सुविधाओं तक नहीं है। ऐसे में जब अनुसूचित जाति के छात्रों के बीच शिक्षा का प्रसार हो रहा है सूक्ष्म इकाइयों की पुनर्वित्तीयन सेवा उनके लिए उत्साहवर्द्धक हो सकती है।
सरकार के मुद्रा बैंक प्रस्ताव से इन संस्थाओं के लिए समान नियामक और आचरण संहित स्थापित हो सकेगी जिससे सभी कर्जदाताओं को जिम्मेदार कर्ज सिद्धान्त अपनाने होंगे और बदले में कर्जदारों के फायदा उठाने के मुद्दों से बचा जा सकेगा। यह गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों-सूक्ष्म वित्तीय संस्थाओं और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य उद्यमियों को आर्थिक मदद और नगदी का प्रमुख स्रोत हो सकता है।
मुद्रा बैंक प्रमुख रूप से निम्न बातों के लिए जिम्मेदार होगा:-
1) सूक्ष्म/ लघु संस्थाओं वित्तीय व्यवसाय के लिए नीति-निर्देश तैयार करना
2) एमएफआई संस्थाओं का पंजीकरण
3) एमएफआई संस्थाओं का नियमन
4) एमएफआई संस्थाओं को मान्यता/रेटिंग
5) ऋणग्रस्तता से बचने और ग्राहक के उचित संरक्षण सिद्धांतों और वसूली के तरीके सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार वित्तीय व्यवस्था तैयार करना
6) सभी सूक्ष्म/लघु उद्यमों को अनुबंध के साथ ऋण
7) ऋण के लिए सही प्रौद्योगिकी समाधान को बढ़ावा
8) सूक्ष्म उद्यमों को दिए जाने वाले ऋणों के लिए गारंटी प्रदान करने के उद्देश्य से ऋण गारंटी योजना की व्यवस्था और संचालन करना
9) प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत सूक्ष्म व्यवसायों तक ऋण पहुंचाने के लिए संरचना तैयार करना।
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