हम जितना भी बचत करते हैं तो वो हमारे देश के विकास में कितना उपयोगी है यह शायद बहुत कम ही लोग जानते हैं। दरअसल, आपकी बचत जितनी आपके लिए फायदेमंद होती है उससे कहीं ज्यादा देश के विकास में उपयोगी होती है। देश में बैंकिंग संस्थाओं व सरकारी वित्तीय संस्थाओं में बचत करने की ट्रेंड (प्रवत्ति) जितना होगा उससे देश के विकास की संभावनाएं और अर्थव्यवस्था तथा रोजगार उतपन्न होने की संभावनाएं उतनी ही प्रबल होती जाएंगी। बशर्ते, बचत की पहल हर स्तर पर होनी चाहिए और फिरजूल खर्च कम।

कई आर्थिक जानकार मानते हैं कि फिजूल खर्च ज्यादा होतो निवेश कम होता है और निर्माण कम होता है जिससे रोजगार कम होते हैं और रोजगार कम तो आय कम और गरीबी। थोड़ा गहराई से सोचा जाए तो जो भी हम बचत करते हैं उसका मुद्रा मार्केट में फ्लो होता है। मनी एक लिक्विड होता है उदाहरण के तौर पर पानी जैसा। यह चारों और से जब बहकर एक जगह पर एक साथ मिलता है तो एक बड़ा जलाशाय बनता है।

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सरकारी बचत कम हुई है

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प्रो. आर. वैद्यानाथन के मुताबिक घरेलू आय से होने वाली बचत देश में पूंजी निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। क्योंकि सरकारी व प्राइवेट कॉरपोरेट सेक्टर की ओर से की जा रही बचत का हिस्सा पूंजी निर्माण में बहुत कम है। आंकड़ों की बात करें तो पूंजी निर्माण में घरेलू आय से होने वाली बचत का हिस्सा 72 फीसदी है। वहीं इसकी तुलना में पूंजी निर्माण में सरकार की ओर से की गई बचत का हिस्सा महज 4 फीसदी है। दूसरी ओर प्राइवेट कॉरपोरेट सेक्टर की ओर से बचत का हिस्सा 24 फीसदी है। यानी देश के केपिटल फोरमेशन मतलब पूंजी निर्माण में सबसे ज्यादा भूमिका घरेलू बचत की होती है।

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धीरे-धीरे घट रहा है बचत का ट्रेंड

आपको बता दें कि बचत का ट्रेंड धीरे-धीरे कम हो रहा है तो जबकि फिजूल खर्च बढ़ा है। फिजूल खर्च जैसे तंबाकू पर हद से ज्यादा खर्च और ऐसी चीजों पर खर्च जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी को फायदा नहीं पहुंचाती या कहें कि ऐसा खर्च जिसकी यह संभावनाएं कम ही रहती हैं कि यह आगे जाकर विकास या जनकल्याण के लिए काम आएगी। आपकी बचत आपके लिए ही नहीं बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी उपयोगी है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2000-01 में घरेलू बचत का हिस्सा 90 फीसदी था। वहीं अब यह घटकर 70 फीसदी हो गया है।