हर माता-पिता अपने बच्‍चों को अच्‍छी शिक्षा देने का प्रयास करते हैं। वो चाहते हैं कि उनके बच्‍चे पढ़-लिख कर अच्‍छे इंसान बनें और खूब तरक्‍की करें। वो उन्‍हें पढ़ाई के साथ-साथ खेल, संगीत, नृत्‍य, आदि भी सिखाते हैं, ताकि वो ऑलराउंडर बनें। आप भी इसी दिशा में अग्रसर होंगे, लेकिन क्‍या आपने अपने बच्‍चों को पैसे की कीमत समझने की शिक्षा दी? शायद नहीं। वैसे यह काम बहुत कम मां-बाप ही करते हैं।

पैसे की कीमत से हमारा मतलब पैसे के महत्‍व से नहीं है, हमारा मतलब है धन की बचत से। अगर आप भी अपने बच्‍चों में पैसा बचाने की आदत डालना चाहते हैं। और चाहते हैं कि वो बड़े होकर अच्‍छी जगह इंवेस्‍ट करें तो निम्‍न बातें उन्‍हें जरूर सिखायें।

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- अपने बच्‍चों को उस दिन से पैसे का हिसाब किताब सिखाना शुरू कर दें, जिस दिन से वो अंकों का जोड़ घटाना सीखना शुरू करते हैं। कहानियों और खेलों के माध्‍यम से धन के महत्‍व को समझायें।
- जैसे-जैसे बच्‍चे बड़े होते हैं, उनकी डिमांड बढ़ जाती है। धीरे-धीरे उन्‍हें पैसे की कीमत समझायें। उन्‍हें अपने संघर्ष की सत्‍य कहानियां बतायें और बतायें कि कितनी कठिनाईयों के साथ पैसा कमाया जाता है। उन्‍हें ईमानदारी के साथ पैसा खर्च करना सिखायें।

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- बच्‍चों की कई डिमांड सही नहीं होती हैं। उन्‍हें बतायें कि जो वो मांग रहे हैं, वो कितनी गलत है और कितनी सही। उसके बाद उन्‍हें निर्णय लेने दें कि उन्‍हें क्‍या चाहिये।

- उनकी हर जरूरतों के लिये एक निश्चित धनराशि दें। उन्‍हें विकल्‍प देने के प्रयास करें। उन्‍हें बतायें कि जितना पैसा वो बचा कर लायेंगे, वो उनकी बचत के लिये रख दिया जायेगा।

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- बड़े होने पर बच्‍चों को दैनिक अथवा मासिक खर्च दिया जाता है। उनके खर्च पर सख्‍ती से नज़र रखें। उनसे कहें कि वो अपने खर्च की सूची बनायें और आपको दिखायें। उन्‍हें समझायें कि यह सब आप उनके भले के लिये ही कर रहे हैं। ऐसा करने से वो आगे चलकर बड़ी राशियों पर बचत करने में सक्षम होंगे।

- अगर आपका बच्‍चा अच्‍छी मात्रा में पैसा बचाता है, तो उसे कोई अच्‍छा तोहफा लाकर दें। इससे बचत के लिये वो और ज्‍यादा उत्‍साहित होगा।

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- कभी-कभी बच्‍चों से भी उधार लें। उसमें ब्‍याज जोड़ कर उन्‍हें पैसा वापस करें। इससे वो जानेंगे कि बाज़ार में किस तरह ब्‍याज के दम पर पैसा बढ़ाया जाता है। जितनी ज्‍यादा वो बचत करेंगे, उतनी ही बड़ी राशि आप उनसे मांग सकेंगे और उसी पर ब्‍याज लगाकर ज्‍यादा धन वापस करने से उनका मनोबल बढ़ेगा। यदि बचपन में वो ऐसा देखेंगे, तो बड़े होकर वो बड़े निवेश करने में और उनका हिसाब रखने में सक्षम होंगे।

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- यदि निवेश या पैसे के लेनदेन से संबंधित कोई भी सवाल बच्‍चा पूछे तो उसे मना मत करें।

- हर बार बच्‍चे को लाभ हो ऐसा भी नहीं होने दें। कभी घाटा भी होने दें, ताकि उसे पता चलेगा कि हां घाटा होने से क्‍या परिस्थितियां होती हैं।