नई दिल्ली, मार्च 28। कहते हैं कि किसी की किस्मत कभी भी पलटी मार सकती है और किसी को फर्श से अर्श और अर्श से फर्श पर ला सकती है। अकसर मछुआरों को ऐसी चीज मिल जाती है, जो उन्हें रातोंरात मालदार बना देती है। जैसे कि कुछ लोगों को व्हेल की उल्टी मिल जाती है, जो एक बहुत महंगी आइटम है और करोड़ों रु में बिकती है। इसी तरह कुछ मछुआरों को कोई दुर्लभ मछली मिल जाती है, जिसकी कीमत बहुत अधिक होती है। बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के एक मछुआरे को एक खास मछली मिली है, जिसने उस मछुआरे को लाखों रु की कमाई करा दी। जानते हैं इस मछुआरे की कहानी।
पूर्वी गोदावरी जिले के अंतर्वेदी गांव में एक मछुआरे को एक काफी दुर्लभ मछली मिली है। इस मछली को 'कचिड़ी' कहा जाता है। कचिड़ी नामक ये दुर्लभ मछली सुनहरी होती है। मछुआरे को जो कचिड़ी मछली मिली है उसका वजन 28 किलोग्राम है। इस एक मछली से मछुआरे को 2.90 लाख रुपये की इनकम हुई। यानी रातोंरात एक ही मछली ने मछुआरे की किस्मत बदल दी।
इस खास मछली को आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में एक मिनी-फिशिंग बंदरगाह पर पकड़ा गया। बाद में मछुआरे ने भीमावरम के निकट नरसापुरम शहर में एक व्यापारी को इस सुनहरी मछली बेच दी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 'कचिड़ी' मछली को वास्तव में मछुआरों और व्यापारियों द्वारा इसकी उच्च कीमत के कारण सुनहरी मछली के नाम से जाना जाता है। यह खास मछली गहरे समुद्र में पाई जाती है। जानकारी के अनुसार मछली के कुछ हिस्सों का उपयोग हेल्थकेयर सेक्टर में दवाओं में किया जाता है। जो मछुआरे और व्यापारी इन मछलियों को खरीदते हैं, वो उन्हें निर्यात या रीसेल के लिए खरीदते हैं। फिर अधिक कीमतों पर बेचकर पैसा कमाते हैं। मत्स्य विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि 'गोल्डन फिश' शब्द इसकी उच्च लागत के कारण गढ़ा गया था।
मछली के कुछ हिस्सों, पित्ताशय और उसके फेफड़ों के कुछ हिस्सों का उपयोग सर्जरी के दौरान डॉक्टरों और चिकित्सकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले धागा बनाने में भी किया जाता है। जिस सुनहरी मछली को पकड़ा वो एक जगह से दूसरी जगह जाती रहती है और इसे पकड़ना इतना आसान नहीं है। मछली पकड़ने की प्रोसेस ट्रायल और त्रुटि की है।
बता दें कि हाल ही में, विशाखापत्तनम में एक मछुआरे ने लंबे समय तक जाल फैलाने के बाद एक हैवीवेट मछली पकड़ी। मछली के बड़े आकार के कारण, मछुआरे को एक बड़े आकार की रस्सी से उसे किनारे तक ले जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। बाद में, वे आश्चर्यचकित रह गए जब यह पाया गया कि वे मछली एक वास्तव में एक व्हेल थी, जिसका कुल 1,200 किलोग्राम वजन है। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे खाने योग्य नहीं हैं या इनका सेवन नहीं किया जाता है, लेकिन व्हेल से निकाले गए तेल का उपयोग कुछ दवाएं तैयार करने के लिए किया जाता है। मछुआरे व्हेल को जीवित वापस समुद्र में छोड़ना पसंद करते हैं।
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