Women Reservation Bill: सरकार ने गुरुवार को संसद में एक लेजिस्लेटिव पैकेज पेश किया, जिसके तहत 2029 के आम चुनावों से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जाएगा। यह प्रस्ताव पहली बार रखे जाने के लगभग तीन दशक बाद पेश किया गया है। यह विधेयक केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में पेश किया।

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इस पैकेज में तीन बिल शामिल हैं-

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  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  • परिसीमन विधेयक, 2026
  • केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026

कानून मंत्री ने पहले दो विधेयक पेश किए, जबकि गृह मंत्री ने तीसरा विधेयक पेश किया।

महिला आरक्षण विधेयक का मकसद क्या है?

इन बिलों का मकसद, मौजूदा 2023 के कानून के तहत जनगणना से जुड़े परिसीमन के दायरे से महिलाओं के लिए आरक्षण को अलग करना है। इस कानून की वजह से आरक्षण का लागू होना असल में 2034 तक टल गया था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सीटों की संख्या में लगभग एक जैसा विस्तार होने की संभावना है, जिसमें लोकसभा सीटों की ऊपरी सीमा 850 तय की जा सकती है। इसका मतलब होगा कि महिलाओं के लिए लगभग 273 सीटें आरक्षित होंगी।

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इस विधायी पैकेज का उद्देश्य 'महिला आरक्षण अधिनियम'-जिसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से भी जाना जाता है-के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करना है।

विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि वे महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करती हैं, लेकिन परिसीमन के दायरे को लेकर अपनी चिंताओं का हवाला देते हुए वे इन बिलों के खिलाफ वोट करेंगी।

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इन संशोधनों को पास कराने के लिए सदन में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस, SP, तृणमूल और DMK जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों का समर्थन और 50% राज्यों की मंजूरी मिलना बेहद जरूरी हो जाएगा।

अनुच्छेद 368 के तहत, संविधान में किसी भी संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इसे 'विशेष बहुमत' के रूप में जाना जाता है। लोकसभा की वर्तमान प्रभावी सदस्य संख्या 540 होने के कारण, यदि सभी सदस्य उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार को न्यूनतम 360 मतों की आवश्यकता होगी।