Internet Slow Down: लाल सागर में समुद्र के नीचे बिछाई गई केबलों के डैमेज होने के बाद भारत, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में इंटरनेट यूजर्स को भारी रुकावट का सामना करना पड़ा। इस रुकावट का असर संयुक्त अरब अमीरात पर भी पड़ा, जहां एतिसलात और डू जैसे नेटवर्क धीमे हो गए। यह दिखाता है कि वैश्विक इंटरनेट का कितना बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछाई गई केबलों पर निर्भर करता है। लेकिन समुद्र के नीचे इंटरनेट लाइनें कौन बिछाता है?

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अंतर्राष्ट्रीय समुद्री केबल भारत की स्थलीय सीमाओं पर स्थित अलग-अलग शहरों में 17 अलग-अलग स्थानों पर बिछाई गई हैं। अलग-अलग महासागरों की तलहटी में बिछाई गई ये केबलें अलग-अलग महाद्वीपों से भारत तक फैली हुई हैं।

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इंटरनेट रुकावट का कारण

यह रुकावट लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां यमन के हूती विद्रोहियों ने 2023 के अंत से अब तक 100 से ज्यादा जहाजों पर हमला किया है, जिसमें चार जहाज डूब गए हैं और कम से कम आठ नाविक मारे गए हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जवाबी कार्रवाई की है, जबकि इजराइल हमास के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए है।

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यमन की निर्वासित सरकार ने हूतियों पर समुद्र के नीचे बिछाई गई केबलों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है, हालांकि समूह इससे इनकार करता है। हूती आंदोलन के स्वामित्व वाले यमन स्थित अल-मसीरा टीवी ने कटौती की बात स्वीकार की है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

भारत में हाल ही में इंटरनेट सेवाएं धीमी क्यों हुईं?

लाल सागर में बिछाई गई अंतर्राष्ट्रीय समुद्री केबलों में रुकावट के कारण भारत में कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट सेवाएं धीमी हो गई हैं। ऐसा संदेह है कि लाल सागर में जहाजों के आवागमन पर हूतियों के बार-बार हमलों के कारण समुद्र तल पर बिछाई गई केबलें क्षतिग्रस्त हो गई होंगी।

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भारत सरकार ने रुकवाट पर क्या कहा?

  • गहरे समुद्र का दबाव
  • संक्षारण
  • समुद्री गतिविधि

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 2023 में दुनिया भर में 200 से ज्यादा पनडुब्बी केबल मरम्मत की रिपोर्ट दर्ज की गई।

सरकार इन सब-मरीन केबलों के रखरखाव पर कितना पैसा खर्च करती है?

हालांकि, कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है जो बताता हो कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबलों के रखरखाव पर कितना खर्च करती है। लेकिन हाल ही में, केंद्र ने तेज इंटरनेट सेवाएं देने के लिए दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है, एक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए और दूसरी लक्षद्वीप के लिए। भाजपा सरकार ने लक्षद्वीप के लिए ₹1,072 करोड़ और लक्षद्वीप के लिए ₹1,224 करोड़ का बजट तय किया है।

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यूरोप-एशिया की 90% से ज्यादा इंटरनेट लाल सागर के केबल पर

लाल सागर उन केबलों का एक प्रमुख केंद्र है जो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा ले जाते हैं। टेलीज्योग्राफी के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, कई देशों के आधे से ज्यादा अंतर-क्षेत्रीय बैंडविड्थ लाल सागर के केबलों के जरिए यूरोप तक पहुंचते हैं। कुल मिलाकर, यूरोप-एशिया की 90% से ज्यादा इंटरनेट क्षमता लाल सागर के केबलों से होकर गुजरती है।

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समुद्र के नीचे केबल कौन बिछाता है?

जहां तक भारत का सवाल है, घरेलू इंटरनेट के लिए समुद्र के नीचे बिछी केबलें बेहद अहम हैं, जो देश के 95% से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय डेटा को अपने साथ ले जाती हैं। ये फ़ाइबर-ऑप्टिक केबल समुद्र के नीचे हजारों किलोमीटर तक फैली हैं, जो भारत को यूरोप, मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ़्रीका से जोड़ती हैं। ये केबल ईमेल, वीडियो कॉल, ई-कॉमर्स, क्लाउड सेवाएँ और कई अन्य ऑनलाइन कार्यों को संभव बनाती हैं।

इन केबलों को बिछाना और उनका रखरखाव बेहद विशेषज्ञता वाला काम है। सरकारों के बजाय, निजी कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम इसे संभालते हैं। भारत में, प्रमुख कंपनियों में टाटा कम्युनिकेशंस, रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, सिफी टेक्नोलॉजीज और बीएसएनएल शामिल हैं।

वैश्विक स्तर पर, सबकॉम, अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स और टीई सबकॉम जैसी कंपनियां संवेदनशील क्षेत्रों और गहरे समुद्र के खतरों से बचने के लिए विशेष जहाजों का इस्तेमाल करके इन केबलों को डिजाइन और बिछाती हैं।