Tomato Prices: सप्लाई में रुकावट की वजह से टमाटर की कीमतों में तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है। इस तेजी को कम करने के लिए सरकार कोऑपरेटिव आउटलेट्स के जरिए सब्सिडी वाली दरों पर टमाटर बेचने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। पूरे देश में टमाटर की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 44.36 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जो एक साल पहले 34.43 रुपये प्रति किलोग्राम थी। पिछले हफ्ते उपभोक्ता मामलों के विभाग ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी।

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टमाटर के भाव आसमान पर पहुंचे

कई स्थानीय खुदरा बाजारों में अभी टमाटर 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहे हैं। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश भारत में टमाटर की खुदरा कीमतों में उछाल आया है। इसकी वजह है सप्लाई में देरी, उत्पादन वाले इलाकों में मौसम की वजह से रुकावटें और फसल चक्र (साइकल) बदलने के दौरान बाजार में सप्लाई का कम होना। गौरतलब है कि दिल्ली के कुछ इलाकों, जैसे ग्रेटर कैलाश में टमाटर लगभग 92 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहे हैं।

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सरकार सब्सिडी वाले टमाटर क्यों बेचना चाहती है?

इस योजना के तहत, सरकार नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) और दूसरे कोऑपरेटिव नेटवर्क के आउटलेट्स के जरिए 35-45 रुपये प्रति किलो के भाव पर टमाटर बेच सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबकि यह कदम सब्सिडी वाली दरों पर टमाटर बेचकर उठाया जाएगा। बाजार के हालात को देखते हुए, दिल्ली-NCR और मुंबई की चुनिंदा जगहों पर बिक्री शुरू होने की संभावना है और बाद में इसे दूसरे शहरों तक बढ़ाया जाएगा।

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महंगाई का खतरा!

भारत में खाने-पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 4.78% हो गई है, जो अप्रैल में 4.2% थी। इसमें टमाटर, अदरक और दूसरी चीजों की कीमतों का बड़ा हाथ है। अक्सर यह देखा गया है कि टमाटर की कीमतों में तेजी से उछाल आने पर सब्जियों की महंगाई बढ़ती है, जिससे खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर भी बढ़ जाती है।

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आपको बता दें कि सिर्फ टमाटर में बढ़े महंगाई की वजह से जुलाई-अगस्त 2023 में भारी बारिश की वजह से सप्लाई में रुकावट आने के कारण कई बाजारों में टमाटर की कीमतें 200 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा हो गईं। इस उछाल के कारण जुलाई 2023 में सब्जियों की महंगाई दर बढ़कर 37.3% हो गई, जबकि खाने-पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर 11.5% तक पहुंच गई, जो तीन साल से ज्यादा समय में सबसे ज्यादा थी।