Vedanta Demerger: आज एक स्पेशल प्री-ओपन सत्र (SPOS) के दौरान वेदांता के शेयर की कीमत में 65% की भारी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, यह तेज गिरावट पूरी तरह से तकनीकी है और इससे निवेशकों की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि शेयर ने अपने डीमर्जर के अनुसार खुद को समायोजित कर लिया है। SPOS के बाद, वेदांता का शेयर 289.50 रुपये पर खुला। इस दौरान, इसने दिन का उच्चतम स्तर 292 रुपये और न्यूनतम स्तर 271.50 रुपये छुआ, जो इसके पिछले बंद भाव (773.60 रुपये) से 65% की गिरावट को दिखाता है।

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क्यों आई गिरावट?

वेदांता के शेयरों में गिरावट तब आई है जब वेदांता ने 'एक्स-डिमर्जर' आधार पर ट्रेडिंग शुरू की है। इसका मतलब है कि अब शेयर की कीमत में इसके चार नए अलग किए गए बिजनेस का प्राइस शामिल नहीं है। निवेशकों के लिए, यह कॉर्पोरेट पुनर्गठन में देखा जाने वाला एक सामान्य समायोजन है, जिसमें मूल कंपनी के शेयर की कीमत रीसेट हो जाती है, जबकि शेयरधारकों को अलग से लिस्टेड संस्थाओं में प्रोपेशनल वैल्यू मिलता है। आसान शब्दों में कहें तो, भले ही मुख्य कीमत काफी कम दिख रही हो, लेकिन निवेश का कुल मूल्य बरकरार रहता है, क्योंकि शेयरधारकों को अलग हुई कंपनियों में शेयर मिलेंगे।

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यह डीमर्जर, जो 30 अप्रैल, 2026 से लागू हो गया है, अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले समूह को पांच स्वतंत्र रूप से लिस्टेड कंपनियों में बांट देगा। इस प्रोसेस के हिस्से के रूप में, कंपनी ने 1 मई, 2026 को रिकॉर्ड डेट के रूप में तय किया है, ताकि नई संस्थाओं में शेयर आवंटन के लिए पात्र शेयरधारकों का तय किया जा सके। हालांकि, उस दिन BSE और NSE दोनों पर महाराष्ट्र दिवस की छुट्टी होने के कारण ट्रेडिंग बंद रहेगी।

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एडजस्टमेंट से पहले, वेदांता के शेयर पिछले सेशन (29 अप्रैल) में NSE पर लगभग 5% बढ़कर 773.60 रुपये पर बंद हुए थे, जो रीस्ट्रक्चरिंग से पहले निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। इसलिए, शेयरों में आई 59% की गिरावट को सही संदर्भ में देखा जाना चाहिए। शेयरों की वैल्यू कम नहीं हुई है, बल्कि इसे कई लिस्टेड कंपनियों के बीच बांट दिया गया है।

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निवेशकों के लिए, यह डीमर्जर लंबे समय में वैल्यू बढ़ाने का एक ज़रिया बन सकता है। इससे हर बिजनेस सेगमेंट की वैल्यू का आकलन उसके अपने फंडामेंटल्स, ग्रोथ की संभावनाओं और सेक्टर की स्थितियों के आधार पर अलग से किया जा सकेगा।