Co-Founder and CEO of Perplexity Aravind Srinivas: टेक दुनिया में हलचल मचाने वाला कदम उठाते हुए, Perplexity AI के संस्थापक और CEO अरविंद श्रीनिवास ने गूगल के मशहूर क्रोम ब्राउजर को खरीदने की पेशकश की है। करीब 34.5 अरब डॉलर (लगभग 2.96 लाख करोड़ रुपए) का यह ऑफर सीधे गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट इंक को भेजा गया है। यह पेशकश ऐसे समय पर आई है, जब गूगल पर अमेरिका में एकाधिकार तोड़ने के लिए कानूनी दबाव बढ़ रहा है।

Advertisement

चेन्नई से सिलिकॉन वैली तक का सफर

अरविंद श्रीनिवास का जन्म 7 जून 1994 को चेन्नई में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहे अरविंद ने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और M.Tech की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी पूरी की।

Advertisement

पढ़ाई के दौरान ही उन्हें OpenAI, Google Brain और DeepMind जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के साथ काम करने का मौका मिला। 2022 में उन्होंने Denis Yarats, Johnny Ho और Andy Konwinski के साथ मिलकर Perplexity AI की नींव रखी जो आज तेजी से बढ़ता हुआ AI सर्च इंजन है।

क्रोम खरीदने की वजह

अमेरिका की अदालत ने हाल ही में गूगल के खिलाफ यह निष्कर्ष निकाला कि उसने इंटरनेट सर्च में एकाधिकार कायम किया हुआ है। इसके चलते अमेरिकी सरकार ने कंपनी को कुछ बदलाव करने और क्रोम ब्राउजर बेचने पर विचार करने का सुझाव दिया।

Advertisement

यही मौका देखते हुए, अरविंद श्रीनिवास ने क्रोम को खरीदने का ऑफर दिया। उनका मानना है कि क्रोम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को बेहतर AI इंटीग्रेशन और नई टेक्नोलॉजी के साथ और भी यूजफुल बनाया जा सकता है।

पर्प्लेक्सिटी की मौजूदा ताकत

Perplexity AI की मौजूदा वैल्यू करीब 18 अरब डॉलर आंकी गई है। इस साल कंपनी ने 100 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। कंपनी के मुख्य बिजनेस अधिकारी दिमित्री शेवेलेन्को के अनुसार, कई बड़े निवेश फंड इस सौदे को फाइनेंस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

Advertisement

अगर यह सौदा हो जाता है, तो अगले दो सालों में क्रोम और क्रोमियम पर करीब 3 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, ताकि उन्हें और तेज़, सुरक्षित और AI-फ्रेंडली बनाया जा सके।

टिकटॉक में भी दिखा था इंटरेस्ट

यह पहला मौका नहीं है जब Perplexity ने किसी बड़े अधिग्रहण में दिलचस्पी दिखाई हो। कुछ महीने पहले कंपनी ने टिकटॉक के अमेरिकी ऑपरेशंस को अपने साथ मिलाने का प्रस्ताव दिया था। उस समय अमेरिका में टिकटॉक के बैन की चर्चा चल रही थी, और अरविंद का मानना था कि यह सही समय है इस प्लेटफॉर्म को नए अंदाज में पेश करने का।