What is the SIR Electoral Roll? Election Commission of India, Special Intensive Revision: चुनाव आयोग ने समय-समय पर मतादाता सूची की खामियों को दूर कर वैध मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के कई प्रयास किए हैं। अब इस दिशा में बिहार विधानसभा चुनाव के साथ शुरु हुए SIR यानी स्पेशनल इंटेनसिव रिविजन के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है।
देश के चुनाव आयोग ने सोमवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दूसरे चरण की आधिकारिक घोषणा की। एसआईर के दूसरे चरण में देश भर के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जाएगा।
2026 के चुनावों से पहले सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची अपडेट करने का यह व्यापक कार्य किया जा रहा है। यह चुनाव आयोग द्वारा हाल के वर्षों में सबसे बड़े मतदाता सूची सफाई अभियानों में से एक है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आगामी चुनावों में प्रत्येक पात्र नागरिक शामिल हो।
SIR मतदाता सूची क्या है? SIR का उद्देश्य
व्यापक पुनरीक्षण के तहत नई मतदाता सूची तैयार करने के लिए घर-घर जाकर गणना की जाती है। मौजूदा मतदाता सूचियों से परामर्श किए बिना, गणनाकर्ता प्रत्येक घर जाकर योग्य मतदाताओं की सूची बनाते हैं। ऐसा तब किया जाता है जब चुनाव आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि मौजूदा मतदाता सूचियों को पूरी तरह से नए सिरे से बनाने की ज़रूरत है या वे त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसा आमतौर पर महत्वपूर्ण चुनावों से पहले या निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद होता है। इस व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत लगभग 51 करोड़ मतदाताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
SIR 2 किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा?
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के दूसरे चरण में देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल है।
मतदाता सूची संशोधन 2025-26 की प्रमुख तिथियां
- चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गणना प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होगी।
- 28 अक्टूबर से 3 नवंबर, 2025: एसआईआर की तैयारी के लिए प्रींटिंग और प्रशिक्षण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
- 4 नवंबर से 4 दिसंबर, 2025: घर-घर जाकर गणना का चरण होगा, जहां बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं के विवरण की पुष्टि करने के लिए घर-घर जाएंगे।
- 9 दिसंबर, 2025: चुनाव आयोग सार्वजनिक जांच के लिए मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित करेगा।
- 9 दिसंबर, 2025 से 8 जनवरी, 2026: मतदाताओं के लिए विवरण सही करने, नाम जोड़ने या आपत्तियां दर्ज करने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि खुली रहेगी।
- 9 दिसंबर, 2025 से 31 जनवरी, 2026: नोटिस चरण, जिसमें सुनवाई और दावों का सत्यापन शामिल है, आयोजित किया जाएगा।
- 7 फ़रवरी, 2026: सभी सुधार और सत्यापन पूरा होने के बाद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
मतदाता सूची सत्यापन के लिए सांकेतिक दस्तावेज़ों की सूची
हालांकि गणना के दौरान कोई भी दस्तावेज़ अनिवार्य नहीं है, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने सांकेतिक (संपूर्ण नहीं) दस्तावेज़ों की एक सूची प्रदान की है जिनका उपयोग सत्यापन या दावों के दौरान किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:
- सरकार द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालयों से शैक्षिक प्रमाण पत्र
- राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या जाति प्रमाण पत्र
- राज्य या स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर
- सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि या आवास आवंटन प्रमाण पत्र
- आधार (09.09.2025 के ईसीआई निर्देशों के अनुसार)
फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची
मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित की जाएगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह समय-सीमा भारत के चुनाव आयोग को 2026 में होने वाले प्रमुख राज्य चुनावों से पहले अद्यतन मतदाता डेटा को अंतिम रूप देने में सक्षम बनाएगी।
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