नयी दिल्ली। बजट 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार की विनिवेश लक्ष्य का जिक्र किया था। इसमें देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी में सरकारी हिस्सेदारी बेची जाने की भी बात कही गई थी। बाद में सरकार ने कई और पीएसयू कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की योजना बताई। मगर ट्रेड यूनियन सरकार के इस प्लान के खिलाफ हैं। इस बीच सरकार एलआईसी के आईपीओ के प्लान को आगे बढ़ा रही है, मगर कंपनी के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया है। इतना ही नहीं अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ (एआईआईईए) ने एलआईसी को बचाने के इरादे से एक मुहिम शुरू की है। इससे पहले पिछले महीने एलआईसी के आईपीओ के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी गई थी।
एलआईसी के आईपीओ को रोकने के लिए अब कर्मचारी संगठन 24 अगस्त से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन 30 अगस्त तक चलेगा। इसमें पोस्टर, बैनर, मीडिया और सोशल मीडिया पर सरकार की एलआईसी को लेकर चल रही योजना का विरोध किया जाएगा। गौरतलब है कि यूपी और उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में 100 प्रमुख हस्तियों/प्रोफ़ेसेरों/अर्थशास्त्रियों जैसे लोगों के जरिए सरकार के निर्णय के खिलाफ ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस मामले में सभी पार्टियों के प्रदेश अध्यक्षों/सचिवों और सांसदों/विधायकों को सरकार के कदम के खिलाफ ज्ञापन दिए जाएगा।
बता दें कि एलआईसी की तरफ से सरकार को कुल 26,000 करोड़ रुपए का लाभांश दिया गया है। इसके अलावा सरकार को एलआईसी ने पंचवर्षीय योजनाओं में सरकार को कई हजारों करोड़ रु की मदद की है। आंकड़ों के मुताबित 2017-2022 की पंचवर्षीय योजना में एलआईसी केंद्र सरकार को 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का सहयोग दे चुकी है। आने वाले दिनों में कर्मचारी संगठन एलआईसी के आईपीओ के खिलाफ प्रदर्शनों को रफ्तार दे सकते हैं। कर्मचारी यूनियन सरकार के एलआईसी में हिस्सा बेचने के निर्णय को अतार्किक बता कर देशभर में प्रदर्शन की बात कही है।
भारत में 24 जीवन बीमा कंपनियां हैं, जिनके बीच एलआईसी की वित्त वर्ष 2019-20 में बाजार हिस्सेदारी 69 फीसदी है। 2019-20 में कंपनी ने 1.78 लाख करोड़ रु का फर्स्ट ईयर प्रीमियम हासिल किया था, जो 2018-19 में मिले 1.42 लाख करोड़ रु से 25.17 फीसदी अधिक रहा। एलआईसी, जिसमें सरकार की 95 फीसदी हिस्सेदारी है, के पास 34 लाख करोड़ रु की संपत्ति है। एलएआईसी के प्रस्तावित आईपीओ के खिलाफ अखिल भारतीय एलआईसी कर्मचारी महासंघ सामने आया है। इस संगठन ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर एलआईसी को बचाने की गुहार लगाई। पीएम को लिखे पत्र में संगठन ने कहा है कि एलआईसी में विनिवेश 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के खिलाफ है।
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