नयी दिल्ली। टेलीकॉम सेक्टर में बची तीन प्राइवेट कंपनियों में से एक वोडाफोन आइडिया के लिए एक के बाद एक परेशानी सामने आ रही है। पहले तो बकाया एजीआर का भुगतान करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ फैसला सुनाया, जिससे सबसे अधिक वोडाफोन प्रभावित हुई। इसके बाद एयरटेल के साथ वोडाफोन की रिव्यू पिटीशन को भी शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। अब वोडाफोन के लिए एक और बुरी खबर आयी है। दरअसल इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च कंपनी के डिबेंचरों पर रेटिंग घटा दी है। इंडिया रेटिंग्स ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट में वोडाफोन की याचिका खारिज करने के बाद ही उठाया है। बता दें कि एयरटेल को भी हजारों करोड़ रुपये के बकाया एजीआर का भुगतान करना है। वहीं जियो ने अपने 195 करोड़ रुपये के एजीआर का भुगतान कर दिया है।

Advertisement

3500 करोड़ रुपये के डिबेंचरों की रेटिंग घटी
वोडाफोन ने बीएसई को जानकारी दी है कि इंडिया रेटिंग्स ने इसके 3500 करोड़ रुपये के नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचरों की रेटिंग घटा दी है। इंडिया रेटिंग्स ने रेटिंग बीबीबी से घटा कर बीबीबी- कर दी है। बता दें कि डिबेंचर एक डेब्ट इंस्ट्रुमेंट है, जिसके जरिये कोई कंपनी अपने लिए कर्ज जुटाती है। किसी रेटिंग एजेंसी द्वारा रेटिंग घटाये जाने से किसी कंपनी की साख और पूँजी बाजार से कर्ज लेने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे कंपनी को नया कर्ज लेने में दिक्कत होती है। रेटिंग घटने से निवेशक कंपनी से बचते हैं।

Advertisement

वोडाफोन के सामने बकाया एजीआर चुकाने की चुनौती
एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू एक यूसेज और लाइसेंस चार्ज है, जो टेलीकॉम कंपनियां दूरसंचार विभाग को चुकाती हैं। वोडाफोन आइडिया पर लगभग 53,000 करोड़ रुपये का बकाया एजीआर है। एयरटेल, वोडाफोन और टाटा टेलीसर्विसेज पर मिला कर कुल 1.02 लाख करोड़ रुपये का एजीआर बकाया है। इन टेलीकॉम कंपनियों की योजना 23 जनवरी की डेडलाइन तक इसमें से कुछ पैसे जमा करने की थी। मगर फिर यह विचार किया गया कि शीर्ष अदालत में संशोधित याचिकाओं की सुनवाई तक वे इस मामले पर इंतजार कर सकती हैं।

Advertisement

यह भी पढ़ें - RBI ने वोडाफोन के एम-पैसा का लाइसेंस रद किया, जल्द निकाल लें पैसा