Vodafone Idea: टेलिकॉम सेक्टर की बड़ी कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से एक भारी कर्ज और नकदी की कमी से जूझ रही इस कंपनी को केंद्र सरकार से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बन रही है।

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सरकारी स्तर पर ऐसे विकल्पों पर चर्चा चल रही है, जिनसे AGR से जुड़े बोझ को कुछ कम समय के लिए टाला जा सके और कंपनी को संभालने का मौका मिल सके। इस खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में इसका असर दिखा और Vi के शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

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आज कंपनी के शेयरों की ऐसी है चाल

आज शुरुआती कारोबारी शेसन में वोडाफोन आइडिया के शेयर 3% तक की तेजी के साथ 12 रुपए पर ट्रेड कर रहा था लेकिन कुछ ही समय के बाद सुबह 10:24 मिनट तक 0.17% तक की बिकवाली के साथ 11.63 रुपए पर कारोबार कर रहा है। कंपनी की मार्केट कैप 1,26,002.95 करोड़ रुपए है।

AGR बोझ से दबा है कारोबार

वोडाफोन आइडिया पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू से जुड़ी देनदारी काफी समय से कंपनी के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है। यह रकम हजारों करोड़ रुपये में है और हर साल ब्याज जुड़ने से दबाव और बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से कंपनी के लिए नेटवर्क विस्तार, नई तकनीक में निवेश और रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया था। सरकार की ओर से अगर राहत पैकेज लागू होता है, तो Vi को तुरंत सांस लेने का मौका मिल सकता है।

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कुछ साल के लिए टल सकता है भुगतान दबाव

प्रस्तावित योजना के तहत कंपनी को AGR बकाये के भुगतान में चार से पांच साल की मोहलत मिल सकती है। इस अवधि में बकाये पर कोई नया ब्याज नहीं जुड़ेगा। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी और भविष्य की रणनीति बनाने का समय मिलेगा।

दोबारा तय हो सकती है असली देनदारी

सरकारी स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि AGR से जुड़ी कुल रकम की फिर से समीक्षा की जाए। इसके लिए एक विशेष समिति बनाई जा सकती है, जो टेलीकॉम विभाग और कंपनी दोनों की बात सुनेगी। इस प्रक्रिया के बाद यह तय होगा कि आखिर Vi को कितनी रकम चुकानी है। माना जा रहा है कि अंतिम देनदारी मौजूदा आंकड़ों से काफी कम हो सकती है।

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पहले से तय भुगतान योजना बनी थी मुश्किल

मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, कंपनी को अगले साल से बड़ी किस्तें चुकानी थीं। लेकिन लगातार घाटे और सीमित आय के चलते यह भुगतान योजना व्यवहारिक नहीं लग रही थी। पिछली राहत योजनाओं में ब्याज माफ नहीं किया गया था, जिससे कुल रकम तेजी से बढ़ गई।

कोर्ट के फैसले से शुरू हुआ था संकट

AGR विवाद की जड़ कुछ साल पुराने न्यायालय के फैसले में है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों की आय की परिभाषा को व्यापक माना गया था। इसके बाद कंपनियों पर भारी लाइसेंस और स्पेक्ट्रम चार्ज का बोझ आ गया। तभी से यह मुद्दा पूरे सेक्टर के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

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सरकार की बड़ी हिस्सेदारी

वोडाफोन आइडिया में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। पहले भी सरकार ने कंपनी को राहत देने के लिए बकाये का एक हिस्सा शेयरों में बदला था। इसी वजह से सरकार चाहती है कि कंपनी का संचालन बना रहे और बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म न हो।

निवेश और फंडिंग की उम्मीद

AGR संकट का हल निकलने के बाद Vi के लिए नई पूंजी जुटाना आसान हो सकता है। कंपनी पहले से ही बड़े निवेश की तलाश में है। माना जा रहा है कि सरकारी समर्थन मिलने के बाद घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा दोबारा लौट सकता है।

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[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]