नयी दिल्ली। एजीआर के भुगतान के लेकर परेशान चल रही वोडाफोन ने अपनी M-Pesa सर्विस बंद कर दी है। इसके चलते आरबीआई ने वोडाफोन के M-Pesa का प्राधिकार प्रमाण पत्र या सीओए रद्द कर दिया है। वोडाफोन ने अपनी सर्विस के प्राधिकार का स्वैच्छा से सरेंडर कर दिया, जिस पर आरबीआई ने कार्यवाही की। आरबीआई ने कहा है कि सीओए रद्द होने के बाद कंपनी प्रीपेड भुगतान उपकरणों को जारी करने और संचालन कारोबार नहीं कर सकती। हालांकि अगर किसी ग्राहक या व्यापारी कंपनी पर पीएसओ के रूप में एक वैलिड क्लेम है, तो रद्द करने की तारीख (30 सितंबर 2020) से तीन साल के भीतर अपने दावों के निपटान के लिए कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

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क्या है वोडाफोन एम-पेसा
एम-पेसा की शुरुआत वोडाफोन ने केन्या और तंजानिया में 2007 में की थी। एम-पेसा एक मोबाइल फोन-आधारित मनी ट्रांसफर, फाइनेंसिंग और माइक्रोफाइनेंसिंग सर्विस है। बाद में कंपनी ने इसे भारत के अलावा अफगानिस्तान और साउथ अफ्रीका में लॉन्च किया। फिर 2014 में रोमानिया और 2015 में अलबानिया में एम-पेसा की शुरुआत की गयी। एम-पेसा उपयोगकर्ताओं को अपने मोबाइल से आसानी से वस्तु और सेवाओं के लिए भुगतान, जमा करने, निकालने और ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। पिछले साल वोडाफोन आइडिया ने आदित्य बिड़ला आइडिया पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के बंद होने के बाद m-pesa सर्विस को बंद करने का फैसला किया था, जिसके साथ इसका विलय किया जा रहा था।

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2015 में आरबीआई से मिला लाइसेंस
वोडाफोन एम-पेसा उन 11 फर्मों में से एक थी जिन्हें 2015 में आरबीआई ने भुगतान बैंक लाइसेंस दिया था। ये एक बिना ब्रांच वाली बैंकिंग सेवा है। एम-पेसा को चेक करने के लिए बतौर पायलट आधार पर वोडाफोन ने सफारीकॉम के साथ मिल कर अक्टूबर 2005 में ही लॉन्च कर दिया था। इसके जरिये बिल चुकाने और वर्चुअल अकाउंट में पैसे जमा करने की सुविधा मिलती है।

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