Rupee की हालत डॉलर के मुकाबले खराब होती जा रही है। बुधवार को रुपया ऑल टाइम लो पर आ गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 9 पैसे टूटकर 83.33 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर तक आया। डॉलर सूचकांक इस बीच 0.04 फीसदी बढ़कर 106.75 पर कारोबार कर रहा था।

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मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे की तेजी के साथ 83.24 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ। रुपया कारोबार के दौरान 83.25 के उच्च स्तर एवं 83.27 के निम्न स्तर को भी छुआ। सोमवार को रुपया 83.26 प्रति डॉलर के भाव पर बंद हुआ था।

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डॉलर के मुकाबले रुपया में गिरावट की कई वजह हैं। ग्लोबल स्तर पर तनाव के अलावा घरेलू इक्विटी में कमजोर रुख निरंतर विदेशी फंड की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रुपया कमजोर होने का एक बड़ा फैक्टर अमेरिका का 10 वर्ष वाला ट्रेजरी नोट है। इस ट्रेजरी नोट की यील्ड 5 प्रतिशत के पार जा पहुंच गई है। अमेरिकी ट्रेजरी नोट यील्ड वर्ष 2007 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के पार गई है। इतना ही नहीं इसके अलावा इजरायल और गाजा के बीच तनाव के कारण भी निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है।

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अर्थव्यवस्था पर क्या असर

देश की अर्थव्यवस्था के लिए रुपया का कमजोर होना ठीक नहीं है। इस कारण देश का आयात बिल बढ़ सकता है। अगर इसको आसान भाषा में समझे तो अगर रुपया कमजोर होता है तो फिर देश को आयत के लिए पहले के मुकाबले अधिक पैसे खर्च करने होंगे।

वहीं, ऐसी कंपनियां जो आयत पर निर्भर है उनका मार्जिन भी कम हो जायेगा। कंपनियां ऐसे में भरपाई के लिए अपने प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाएगी। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।

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भारत अपने पेट्रोलियम उत्पाद का एक हिस्सा आयात करता हैं। ऐसे में इस पर रुपया कमजोर होने का असर दिख सकता है। इतना ही नहीं इसके अलावा विदेश घूमना, विदेश से सर्विसेज लेना आदि भी महंगा हो जाएगा।

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