Cipla Pharma Company: फार्मा इंडस्ट्री की बड़ी प्लेयर सिप्ला को अमेरिका की एक संस्था द्वारा जबरदस्त झका लगा है। दरअसल अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफडीए) ने सिप्ला को एक वॉर्निंग लेटर यानी चेतावनी भरा पत्र लिखा है और कंपनी की नई मंजूरी पर रोक लगाने की बात भी कही है। यह मामला मध्य प्रदेश के धार जिले सिप्ला कंपनी के एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से जुड़ा हुआ है। इसी साल 6 से 17 फरवरी तक की अमेरिकी दवा नियामक ने इस प्लांट की करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस की नियमित तौर पर जांच की थी। इस जांच के बाद ही अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने सिप्ला को चेतावनी दी है। यह जानकारी सिप्ला द्वारा एक एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई है।
आइए जानते हैं क्या है फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की वॉर्निंग
अमेरिकी नियामक ने सिप्ला को जो लेटर भेजा है, उसके तहत मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में नियमों के विपरीत तौर तरीकों के बारे में सवाल उठाए गए हैं। इस प्लांट में जो भी तरीके इस्तेमाल हो रहे हैं, वो करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग के जुड़े हुए तय नियम के हिसाब से नहीं है, उनमें जरूरी सुधार करने के लि निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं इस पूरे मामले पर कंपनी का कहना है कि निर्धारित समय में इसका जवाब दाखिल किया जाएगा और पूरे मामले को लेकर सिप्ला अमेरिकी एफडीए के साथ मिल कर काम कर रही है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि क्वालिटी और नियमों का पालन करना उसके लिए सबसे अहम है और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी स्टैंडर्ड को लेकर जो भी शिकायतें हैं, उसे दूर करने के लिए कंपनी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लेटर में क्या कहा
अमेरिकी नियामक द्वारा जारी किए गए लेटर में कहा गया है कि हम गुणवत्ता और अनुपालन को बहुत महत्व देते हैं और सीजीएमपी गुणवत्ता का अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके पहले, कंपनी के मैनेजमेंट ने दूसरे क्वार्टर की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा था किपीतमपुरा और गोवा में सिप्ला के प्लांट में यूएस एफडीए की टिप्पणियों के ारण प्रोडक्ट लॉन्च में लगभग छह महीने की देरी हो रही है। आपको बताते चलें कि पीतमपुरा प्लांट में एडवायर बनाया जाता है। इस दवा का उपयोग अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज के इलाज में किया जाता है। बाजार में इस दवा का कुल कारोबार 700 मिलियन डॉलर का है।
सिप्ला के शेयर
विशेषज्ञों के अनुसार इस वार्निंग का असर सिप्ला कंपनी के शेरों पर पड़ सकता है। लेटर जारी होने के बाद एनएससी निफ्टी पर सिप्ला 1245 रुपए पर गिरावट के साथ कारोबार कर रही है। बात करें इस महीने की तो, सिप्ला के शेयर करीब 4 प्रतिशत अधिक मजबू हुए हैंं। फिलहाल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर इनको शेयर की कीमत 17 नवंबर को बंद होने तक 1249.35 रुपए की थी। अगर पिछले 1 साल के शेयर स्थिति की बात की जाए तो, 22 मार्च को सिप्ला का शेयर सबसे निचले स्तर पर था और इसकी कीमत मात्र 852 रुपए थी। इसके बाद दवा बनाने वाली इस कंपनी के शेयर ने 5 महीने में 50 फीसदी का जबरदस्त उछाल हासिल किया और 10 अगस्त 2023 को इसकी कीमत 1277.55 रुपए पहुंच गई। आपको बताते चलें कि यह सिप्ला कि शयरों में अब तक की रिकॉर्ड हाई प्राइस है। हालांकि इस समय यह इस हाई के मुताबले 2 प्रतिशत से अधिक डाउन साइड पर है।
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