US Tariff War: वैश्विक व्यापार को लेकर अमेरिका की नीतियां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। अमेरिका ने अपने कई बड़े व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों की समीक्षा शुरू की है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि इससे कई देशों पर नए आयात शुल्क यानी टैरिफ लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका ऐसे कदम उठाता है तो इसका असर दुनिया के कई देशों के व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

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16 देशों की व्यापार नीति की जांच

अमेरिकी प्रशासन ने उन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है जिनके साथ अमेरिका का बड़ा व्यापारिक संबंध है। इस जांच का उद्देश्य यह समझना है कि क्या ये देश व्यापार के दौरान ऐसी नीतियां अपना रहे हैं जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो सकता है।

अगर जांच में यह पाया जाता है कि किसी देश की व्यापार नीति अमेरिका के लिए नुकसानदेह है, तो उसके उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिका पहले भी कई बार इस तरह के कदम उठाता रहा है।

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भारत और चीन भी शामिल

जिन देशों की व्यापार नीतियों की जांच की जा रही है उनमें India और China जैसे बड़े बाजार भी शामिल हैं। इसके अलावा European Union, Japan, South Korea, Mexico, Taiwan, Vietnam, Thailand, Malaysia, Singapore, Indonesia, Bangladesh, Switzerland और Norway जैसे देश भी इस प्रक्रिया में शामिल बताए जा रहे हैं।

अगर इन देशों पर नए टैरिफ लगाए जाते हैं तो इससे कई उद्योगों की लागत बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदली रणनीति

हाल ही में Donald Trump को उस समय झटका लगा जब Supreme Court of the United States ने पहले लागू किए गए कुछ टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। ये टैरिफ राष्ट्रीय आपातकाल के नियमों के तहत लगाए गए थे।

इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने नई रणनीति अपनाई और Trade Act of 1974 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए अस्थायी कदम उठाया। इस कानून के तहत लगभग 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत तक का अस्थायी टैरिफ लगाया जा सकता है।

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वैश्विक बाजार की नजर अमेरिका पर

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस जांच से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। अगर नए टैरिफ लागू होते हैं तो कई देशों के निर्यात पर असर पड़ सकता है और दुनिया की सप्लाई चेन में बदलाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल सभी देश इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में अमेरिका के फैसले से तय होगा कि वैश्विक व्यापार का माहौल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।