US-Iran Ceasefire : मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने पिछले कुछ दिनों से पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि लोग तीसरे विश्व युद्ध की आशंका तक जताने लगे थे। हर तरफ बस यही चर्चा थी कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कब बड़ा रूप ले लेगा। खासकर तब, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सख्त बयान दे रहे थे और ईरान को कड़ी चेतावनी दे रहे थे।

Advertisement

US-Iran Ceasefire :

लेकिन इसी तनाव के बीच अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिसने सभी को चौंका दिया। जो ट्रंप कुछ समय पहले तक ईरान को खत्म करने की बात कर रहे थे, उन्होंने अचानक सीजफायर यानी युद्धविराम का ऐलान कर दिया। यह फैसला लोगों के लिए काफी हैरान करने वाला था, क्योंकि हालात युद्ध की तरफ बढ़ते नजर आ रहे थे। ऐसे में सवाल उठने लगे कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ, जिससे ट्रंप को यह फैसला लेना पड़ा?

Advertisement

पाकिस्तान की भूमिका :

दरअसल, खबरों के मुताबिक इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भी अहम भूमिका सामने आई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप से अपील की कि ईरान पर होने वाले बड़े हमले को रोका जाए। इसके बाद ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए हमले को टालने और सीजफायर लागू करने का फैसला लिया।

Advertisement

शहबाज शरीफ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह शांति की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी, जहां दोनों देश अपने मतभेदों को खत्म करने की कोशिश करेंगे। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो आने वाले समय में पूरी तरह शांति बहाल हो सकती है ट्रंप ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि यह सीजफायर कुछ शर्तों के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से खोलना होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। यानी फिलहाल यह राहत अस्थायी है, लेकिन इससे उम्मीद जरूर जगी है कि आगे बातचीत से समाधान निकल सकता है।

Advertisement

क्रूड और मार्केट पर असर :

इस पूरे घटनाक्रम का असर दुनिया के बाजारों पर भी देखने को मिला है। सीजफायर की खबर आते ही शेयर बाजार में तेजी आई और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इससे यह साफ होता है कि दुनिया शांति की खबरों को कितना सकारात्मक रूप से लेती है।

कुल मिलाकर, अभी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं, लेकिन सीजफायर का यह कदम एक अच्छी शुरुआत माना जा रहा है। अब सबकी नजर 10 अप्रैल को होने वाली बातचीत पर टिकी है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो न सिर्फ इस क्षेत्र में शांति आएगी, बल्कि पूरी दुनिया को भी राहत मिलेगी।