US Fed Rate Cut: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने बुधवार (10 दिसंबर) को एक बार फिर से अपनी प्रमुख ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की कटौती की। इस फैसले के साथ ही फेड ने भविष्य में दरों में कटौती की संभावनाओं को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा।

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फेड की नीति निर्धारण समिति, संघीय मुक्त बाजार समिति (FOMC), ने ओवरनाइट लेंडिंग रेट को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में एडजस्ट किया। जो पिछले तीन साल से अधिक समय में (2022 के बाद) सबसे निचला स्तर है। इससे पहले यह दर 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच थी। सितंबर से लेकर अब तक यह फेड की लगातार तीसरी दर कटौती है और इस साल कुल मिलाकर ब्याज दरों में 0.75 प्रतिशत की कमी की गई है।

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2019 के बाद पहली बार इतने सदस्यों ने विरोध में किया वोट

इस फैसले की सबसे अहम बात यह रही कि तीन सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट किया, जो सितंबर 2019 के बाद पहली बार हुआ है। नौ सदस्यों ने कटौती के पक्ष में मतदान किया जबकि तीन ने विरोध में, जिससे फेडरल रिजर्व के भीतर की बढ़ती असहमति साफ उजागर हुई।

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फेड गवर्नर स्टीफन मिरन का मानना था कि व्यापक आर्थिक स्थितियों के लिए अधिक राहत की आवश्यकता है, अतः उन्होंने 0.50 प्रतिशत अंक की कटौती का समर्थन किया। वहीं, कैनसस सिटी फेड के प्रमुख जेफ्री श्मिड और शिकागो फेड के प्रमुख ऑस्टन गूल्सबी ने दरों में किसी भी कटौती का पुरजोर विरोध किया।

एफओएमसी की बड़ी बातें

बैठक के बाद जारी बयान में एफओएमसी ने दिसंबर 2024 में इस्तेमाल की गई भाषा को ही दोहराया, जिसका अर्थ था कि फेड फिलहाल आगे दरों में कटौती से रुक सकता है। समिति ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति में किसी भी भविष्य के बदलाव का निर्णय आने वाले आर्थिक आंकड़ों, बदलती परिस्थितियों और जोखिमों के संतुलन को देखकर होगा।

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लगातार तीन कटौतियों के बाद, अब फेड की भविष्य की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। बैंक के अपने अंदाज़ों से पता चलता है कि आगे की दर कटौती की गुंजाइश काफी सीमित है। फेड अधिकारियों का 'डॉट प्लॉट' इंगित करता है कि 2026 और 2027 प्रत्येक वर्ष में केवल एक ही कटौती की संभावना है, जिसके बाद ब्याज दरें लगभग 3 प्रतिशत पर स्थिर हो सकती हैं।

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आर्थिक मोर्चे पर, फेड ने 2026 के लिए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को 0.50 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया है। लेकिन फेड का मानना है कि महंगाई 2028 तक उसके 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है। सितंबर में फेड के पसंदीदा महंगाई पैमाने के अनुसार, दर 2.8 प्रतिशत दर्ज हुई थी, जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक है।

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ब्याज दरों पर फैसले के साथ, फेडरल रिजर्व ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने ट्रेजरी सिक्योरिटीज की खरीद फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। गौरतलब है कि पिछली अक्टूबर बैठक में फेड ने बताया था कि वह इस महीने से अपनी बैलेंस शीट को सिकुड़ने से रोक देगा।

इस प्रक्रिया के तहत, फेड शुक्रवार से $40 बिलियन मूल्य के ट्रेजरी बिल्स खरीदेगा। यह खरीदारी अगले कुछ महीनों तक ऊंचे स्तर पर रहने की उम्मीद है और फिर इसे काफी हद तक कम किया जाएगा। यह कदम ओवरनाइट फंडिंग मार्केट में संभावित दबाव की आशंकाओं को दूर करने के लिए उठाया गया है।

शेयर बाजार पर कितना असर होगा?

फेडरल रिजर्व के इस फैसले से वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। ब्याज दरों में कटौती के बावजूद केंद्रीय बैंक का सख्त रुख, उसके अंदरूनी मतभेद और भविष्य में सीमित कटौती के संकेत इक्विटी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं, जिससे टेक और ग्रोथ स्टॉक्स पर नकारात्मक दबाव आ सकता है। हालांकि, फेड द्वारा ट्रेजरी बॉन्ड की खरीदारी दोबारा शुरू करने से अल्पकालिक तरलता को सहारा मिलेगा, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक अभी भी सावधानी बरत सकते हैं।

US Fed के रेट कट का भारत के लिए क्या मायने?

भारत के लिहाज से, फेडरल रिजर्व का यह सख्त रुख विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के प्रवाह और रुपये की चाल के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से अपना रुझान कम कर सकते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

हालांकि, भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक वृद्धि और नियंत्रण में रही महंगाई इस बाहरी दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी यह एक सीधा संकेत है कि वह दरों में कटौती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करेगा और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीति में सतर्कता बनाए रखेगा।