US Fed Rate Cut; Impact On India : अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा भारतीय समयानुसार बुधवार (17 सितंबर) देर रात ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत घटाने का ऐलान किया गया। यह 2025 की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की पहली कटौती है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने दो दिन की बैठक के बाद ब्याज दरों में कटौती के फैसले की घोषणा की, जिसके बाद इंटरेस्ट रेट 4 प्रतिशत से 4.25 प्रतिशत के बीच रहेगा।

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ब्याज दरों में कटौती के बीच अमेरिकी शेयर बाज़ार में मिलाजुला असर देखने को मिला। डाओ जोन्स में करीब 450 अंकों (1%) की बढ़त हुई जबकि, S&P 500 में 0.1% की मामूली बढ़त देखी गई। वहीं, टेक शेयरों में बिकवाली के माहौल से नैस्डैक में भी दबाव दिखा। नैस्डैक 0.3% नीचे रहा। 10-साल का ट्रेजरी यील्ड 4% से नीचे गिरी, और अमेरिकी डॉलर में मामूली कमजोरी आई।

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ऐसे में सवाल है कि अमेरिका में हुए ब्याज दरों में कटौती का असर भारत पर कितना दिखाई देगा, क्योंकि अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के चलते भारतीय कारोबार पर इसका असर देखा जा रहा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो फेड रेट कट से भारतीय शेयर बाजार से लेकर रुपया, सोना-चांदी के भाव, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और यहां तक कि विदेशी निवेश (FII) पर भी सीधा असर दिखाई दे सकता है। तो चलिए समझने कि कोशिश करते हैं कहां कितना असर पड़ने की संभावना है...

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घरेलू शेयर बाज़ार पर असर (How Could Impact Indian Stock Market?)

शेयर बाज़ार की बात करें तो इसका असर देखा जा सकता है और इसका सकात्मक असर देखने को मिल सकता है। दरअसल, कम ब्याज दर का मतलब है कि अमेरिकी निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए भारत जैसे बाजारों में पैसा लगाएंगे। इससे शेयर बाजार को बढ़ावा मिलेगा और बॉन्ड मार्केट में भी पैसा आएगा।

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एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि बाजार ने 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती को पहले ही कम करके आंका था, इसलिए सितंबर में फेड द्वारा की गई ब्याज दरों में कटौती का भारतीय शेयर बाजार पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है। हालाँकि, पॉवेल का नरम रुख निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और रिसर्च हेड जी. चोकालिंगम ने कहा, "25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती भारतीय शेयर बाजार को बढ़ावा नहीं देगी क्योंकि यह काफी हद तक कम करके आंका गया है। कुल मिलाकर 50 बेसिस पॉइंट्स या उससे भी बड़ी कटौती भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक होगी।"

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भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए कुल मिलाकर 75-100 प्रतिशत ब्याज दरों में कमी सकारात्मक होगी, क्योंकि इससे अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में कमी आएगी और विदेशी पूंजी प्रवाह में तेजी आ सकती है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के शोध के रिसर्च वाइस प्रसिडेंट अजीत मिश्रा ने कहा, "अगर फेड इस साल एक या दो अतिरिक्त कटौती करता है, तो वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार हो सकता है - भारतीय बाजारों सहित इक्विटी में तेजी आएगी, जबकि बॉन्ड प्रतिफल में कमी आएगी और डॉलर पर दबाव पड़ेगा।"

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मिश्रा का मानना ​​है कि टीसीएस, एचसीएल टेक, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, पीएफसी, बजाज फाइनेंस और एमएंडएम फाइनेंस सहित चुनिंदा आईटी, बैंकिंग और वित्तीय शेयर गुरुवार को फेड के नीतिगत फैसले के कारण प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

डॉलर और रुपया में दिखेगा असर

एक्सपर्ट्स की मानें तो ब्याज दर घटने से डॉलर में थोड़ी कमजोरी आ सकती है और इसका असर भारतीय रुपये में तेजी के रूप में देखने को मिल सकता है। यानी रुपया मजबूत होने से आयात (तेल, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स) थोड़ा सस्ता हो सकता है।

पेट्रोल-डीजल या कच्चे तेल के दाम में तेजी

महंगाई बढ़ने के कारण कच्चे तेल या अन्य कमोडिटी के दाम ऊपर रह सकते हैं। चूंकि भारत कच्चे तेल का बहुत बड़ा आयातक है, ऐसे में यदि तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है।

RBI पर ब्याज दर घटाने का दबाव

अमेरिका द्वारा ब्याज दर घटाए जाने के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई (RBI) पर भी ब्याज दर घटाने का दबाव बढ़ जाएगा। यदि RBI भी ब्याज दरें घटाता है तो महंगाई के नियंत्रित रखने और अर्थव्यवस्था की विकास दर को बरकरार रखने में मदद मिल सकती है।

इलेक्ट्रोनिक सामान हो सकते हैं सस्ते

यदि भारत में विदेशी निवेश बढ़ता है तो रुपया मजबूत होगा और मोबाइल समेत अन्य इलेक्ट्रोनिक सामान थोड़ी सस्ती हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती से अमेरिका में महंगाई कम होगी और लोन सस्ते हो सकते हैं। इसका असर भारत के निर्यात पर भी देखने को मिलेगा।