UP Govt : मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश राज्य में पर्यावरण को हरा-भरा और स्वच्छ बनाएं रखने के उद्देश्य से पेट्रोल व डीजल की बजाए 100 फीसदी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक नए लक्ष्य को तय करते हुए योजना बनाई है।
अगर हम उत्तर प्रदेश की को योजना की बात करें तो फिर दरअसल, मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश ने खुद वर्ष 2030 तक सभी सरकारी विभागों में इस्तेमाल की जाने वाली वाहनों को चरणबद्ध के माध्यम से ईवी में तब्दील करने का टारगेट रखा है। इतना ही नहीं इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने तैयारी भी शुरू कर दी है।
इसके तहत सरकार की ओर से निर्देश दिए गए है कि सरकारी विभाग बिना टेंडर के भी नामांकन के आधार पर इलेक्ट्रिक वाहन को खरीद सकते है। वही, इतना ही नहीं जबकि इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर जरूरत के मुताबिक तय जो अधिकतम सीमा है। इस अधिकतम सीमा से ज्यादा भी खर्च किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश वर्ष 2023 से पहले इस लक्ष्य को हासिल करना चाहती है और सरकारी विभाग में 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन वाला भारत का पहला राज्य बन सकता है।
उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 14 अक्टूबर को यूपी इलेक्ट्रिक व्हीकल विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति 2022 को नोटिफाई किया था। सरकार ने इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर तीन वर्ष तक टैक्स से छूट प्रदान की है। इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन फीस से छूट प्रदान की है। वही, उत्तर प्रदेश में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहन है। इसकी खरीद पर यह जो छूट है यह छूट 5 वर्ष तक मान्य होगी।
सभी विभागों एवं उनके अधीन कार्यरत संस्थाओं को मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की तरफ से निर्देश दिए गए है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की पॉलिसी के अनुरूप वर्ष 2030 तक 100 फीसदी जो वाहन है। इन वाहनों को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में बदल दिया जाएं।
इतना ही नहीं इसके साथ ही सरकारी अभिकरणो से बिना निविदा के नामांकन के आधार पर इलेक्टिक व्हीकल्स की खरीद की जाएं साथ ही शासकीय आयोजन के लिए वाहनों की खरीद पर प्रचलित ऊपरी अधिकतम लिमिट को शिथिल किया जाए।
वही, यूपी के परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा है कि चूंकि अभी तक सरकारी वाहनों की खरीदी जेम पोर्टल पर निविदा के जरिए होती थी लेकिन इससे जो ईवी कंपनियां है वह रजिस्टर्ड नही है। इसी वजह से पॉलिसी में यह व्यवस्था दी गई है कि सरकारी अभिकरणों जैसे एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लि. व राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंट लि. इत्यादि से बिना टेंडर के नामांकन के आधार पर ईवी क्रय किए जा सकेंगे।
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