Sahara Refund Portal: करीब 10 करोड़ लोगों का हजारों करोड़ रुपये सहारा में फंसा है। सेबी और सरकार के काफी प्रयास के बाद भी यह पैसा निवेशकों को वापस नहीं पा रहा है। ऐसे में अब सरकार आज सहारा रिफंड पोर्टल लांच किया है।
सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) में लोग अब सीधे आवेदन कर सकेंगे। इससे सरकार और सेबी के पास सीधे सही जानकारी पहुंचेगी और पैसा वापस करना आसान हो जाएगा।
सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) को आज केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह नई दिल्ली में लॉन्च किया। सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) के जरिए सहारा के उन निवेशकों के पैसे वापस दिए जाएंगे, जिनके निवेश की अवधि यानी समय सीमा पूरा हो चुका है। इस पोर्टल का लिंक नीचे दिया जा रहा है
https://mocrefund.crcs.gov.in/Depositor/Login
पोर्टल पर सहारा इंडिया के इन्वेस्टर्स की डिटेल्स होंगी। यह जानकारी भी होगी कि सहारा में निवेश किए गए पैसों को कैसे वापस पाया जा सकता है। सहारा इंडिया की को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के 10 करोड़ निवेशकों के पैसे फंसे हुए हैं। इसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) में चार को-ऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशक ही कर सकेंगे आवेदन
- सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
- सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड
- हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
- स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड
सहारा ग्रुप की सहकारी समितियों के वास्तविक सदस्यों/जमाकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया था। मार्च में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सहारा ग्रुप की सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के बकाया के भुगतान के लिए 'सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट' से 5,000 करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज में ट्रांसफर किए जाएं।
डिपॉजिटर्स को पैसा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी की निगरानी लौटाया जाना है। इस मामले में एडवोकेट गौरव अग्रवाल जस्टिस रेड्डी को असिस्ट करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2012 में सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) को इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने के निर्देश के बाद सहारा-सेबी एस्क्रो अकाउंट खोले गए थे। जिसमें सहारा ग्रुप की ओर से पैसे जमा करवाए गए थे।
सहारा देश की बड़ी प्राइवेट कंपनियों में से एक हुआ करती थी, जिसके 11 लाख से ज्यादा कर्मचारी थे। रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से लेकर स्पोर्ट्स तक सहारा इंडिया का बिजनेस फैला था। 11 सालों तक यह ग्रुप टीम इंडिया का स्पॉन्सर रहा।
सुब्रत रॉय पर सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) में नियमों के खिलाफ लोगों से पैसे निवेश करवाने का आरोप लगा था। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय को 24,400 करोड़ रुपए निवेशकों को लौटाने को कहा था। तब से लेकर आज तक ये केस चल रहा है।
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