Union Budget 2026: भारत सरकार अपने बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने और किसी एक देश पर ज्यादा निर्भरता घटाने के लिए कुछ खास वस्तुओं पर कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) बढ़ा सकती है और कुछ वस्तुओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद दे सकती है। इस योजना का ऐलान आगामी बजट में हो सकता है।

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एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, कुछ ऐसे सामान हैं जिनके लिए भारत अभी कुछ गिने-चुने देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। सरकार इस जोखिम को कम करना चाहती है। इसी वजह से कुछ उत्पादों को सब्सिडी दी जाएगी, जबकि कुछ पर आयात महंगा किया जाएगा।

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सरकार ने करीब 100 उत्पादों की एक सूची बनाई है, जिन पर ये उपाय लागू हो सकते हैं। इसमें इंजीनियरिंग सामान, स्टील, मशीनरी, और सूटकेस व फर्श सामग्री जैसे उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। फिलहाल इन सामानों पर आयात शुल्क 7.5% से 10% के बीच है।

यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने 292 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 515.2 अरब डॉलर का आयात हुआ। इससे सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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सरकार उद्योगों से भी कह रही है कि वे एक ही स्रोत से सामान मंगाने पर निर्भरता कम करें और देश में बने विकल्प तैयार करें। हालांकि, स्टील उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता और कीमत अभी आयातित सामान से मुकाबला नहीं कर पा रही है।

इस समय चीन भारत के लिए कई सामानों का बड़ा सप्लायर है। भारत-चीन व्यापार में यह असंतुलन साफ दिखाई देता है। सरकार की प्राथमिकता चीन पर निर्भरता कम करना है।

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उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2025 में भारत ने 2.08 करोड़ डॉलर के छाते आयात किए, जिनमें से 1.77 करोड़ डॉलर के छाते चीन से आए। वहीं, 2024-25 में चश्मे और सनग्लास का आयात करीब 11.4 करोड़ डॉलर रहा, जिसमें लगभग आधा हिस्सा चीन से आया।

इसके अलावा, भारत के कुछ कृषि मशीनों के आयात का करीब 90% हिस्सा चीन से आता है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से नवंबर के दौरान भारत ने चीन को 12.2 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि चीन से 84.2 अरब डॉलर का आयात हुआ। इस वजह से भारत को चीन के साथ करीब 72 अरब डॉलर का बड़ा व्यापार घाटा झेलना पड़ा।