Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए 8.5 से 9% की आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रख सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बाधन के अनुसार, इसके साथ ही, देश के विकास को रफ्तार देने के लिए पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाकर 12 से 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार FY26 में 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा कर सकती है और अगले साल यह घटकर 4 से 4.1% तक आ सकता है।

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सोनल बाधन का मानना है कि कैपेक्स इस बजट का सबसे अहम हिस्सा होगा, क्योंकि सरकार चालू वित्त वर्ष में ही अपने पूंजीगत खर्च के लक्ष्य का लगभग 60% नवंबर 2025 तक पूरा कर चुकी है। उन्होंने अगले साल नाममात्र जीडीपी वृद्धि करीब 10% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, उनके मुताबिक बजट 2026 में इनकम टैक्स या अप्रत्यक्ष करों में किसी बड़ी कटौती की संभावना कम है, क्योंकि पिछले बजट और GST 2.0 से काफी सुधार हो चुका है।

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उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे सकती है। इसके तहत निर्यातकों और एमएसएमई के लिए ब्याज सबवेंशन योजना की घोषणा संभव है। साथ ही, कस्टम ड्यूटी को और सरल किया जा सकता है और कुछ कच्चे माल पर शुल्क घटाया जा सकता है, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी।

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नीतिगत दरों को लेकर सोनल बाधन ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक FY26 की आखिरी मौद्रिक नीति में विकास को समर्थन देने के लिए 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती कर सकता है। हालांकि, जीडीपी और महंगाई के अनुमान में बड़े बदलाव की संभावना कम है। बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए आरबीआई ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) बढ़ा सकता है।

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उन्होंने यह भी बताया कि भले ही सरकारी निवेश मजबूत रहा हो, लेकिन निजी निवेश अभी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है। फिर भी, निजी निवेश में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। इसे और बढ़ावा देने के लिए सरकार PLI (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) योजना में बदलाव कर सकती है और रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) के लिए अलग से नई PLI योजना ला सकती है।

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सोनल बाधन के अनुसार, आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस सेक्टर और रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्रों को भी सरकारी समर्थन मिल सकता है, जिससे विदेशी निवेश बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, लेकिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, कस्टम ड्यूटी में कमी और निर्यातकों के लिए बेहतर नीतियों से देश की विकास दर को बनाए रखा जा सकता है। वहीं, विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से सरकारी राजस्व को लगातार सहारा मिलता रहेगा।