Ujjwala Yojana: सरकार ने कम आय वाले परिवारों के लिए खाना पकाने की गैस से जुड़ी बड़ी योजना, 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के तहत सब्सिडी में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत, पात्र लाभार्थियों को अब साल में चार सिलेंडर तक के लिए सब्सिडी वाली LPG रिफिल मिलेगी, जबकि पहले यह सीमा नौ सिलेंडर की थी।

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उज्ज्वला योजना की सब्सिडी में कटौती

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ रही हैं। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव है, जिसने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को बाधित किया है और आयात की लागत बढ़ा दी है। नए नियमों के तहत, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में शामिल परिवारों को आर्थिक मदद तो मिलती रहेगी, लेकिन सालाना मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या कम कर दी गई है।

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  • पहले मिलने वाले सिलेंडर- साल में 9 तक सब्सिडी वाले सिलेंडर
  • अब मिलने वाले सिलेंडर- साल में 4 तक सब्सिडी वाले सिलेंडर
  • सब्सिडी की रकम- उज्ज्वला यूजर्स के लिए प्रति सिलेंडर 300 रुपये तक (पहले चार रिफिल के लिए)

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) मई 2016 में शुरू की गई थी, ताकि गरीब परिवारों की एडल्ट महिलाओं को बिना डिपॉजिट वाले LPG कनेक्शन दिए जा सकें। इसके तहत लाभार्थियों को शुरू में हर साल 14.2 किलोग्राम के 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे। पिछले साल सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटाकर नौ कर दी गई थी और अब इसे और कम करके चार कर दिया गया है।

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खाना पकाने वाली गैस क्यों महंगी हो रही है?

ऑयल मिनिस्ट्री के अनुसार, इंटरनेशनल बेंचमार्क कीमतों में बढ़ोतरी के कारण 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की 'लैंडेड कॉस्ट' (लागत) बढ़कर 1,600 रुपये से ज़्यादा हो गई है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से जुड़ी है, जिसका इस्तेमाल ग्लोबल प्राइसिंग रेफरेंस के तौर पर किया जाता है।

इतनी ज्यादा बढ़ोतरी के बावजूद, ग्राहकों को सीधे पूरी इंटरनेशनल लागत नहीं चुकानी पड़ रही है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इस अंतर का एक बड़ा हिस्सा खुद उठा रही हैं, जिससे अधिकारियों के अनुसार प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये की "अंडर-रिकवरी" (लागत से कम वसूली) हो रही है।