Trump Tariff Impact On India : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद इसका असर भारतीय शेयर मार्केट में देखा जा रहा है। 27 अगस्त से भारत पर लगे 25 फीसदी एडिशनल टैरिफ के बाद पहले कारोबारी दिन में सेंसेक्स-निफ्टी में कमज़ोरी आई।
इस बीच सी-फूड्स (झींगा फ़ीड) के कारोबार में लगी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज हुई। दरअसल, ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गया है।
भारतीय शेयर बाजार पर ट्रम्प टैरिफ का प्रभाव
भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांकों, निफ्टी 50 और सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान नीचे की ओर दबाव का अनुभव किया। बेंचमार्क सेंसेक्स लगभग 700 अंक या 1 प्रतिशत गिरकर 80,093.52 के निचले स्तर पर आ गया। एनएसई का निफ्टी 50 भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 24,507.20 के निचले स्तर पर आ गया।
11 फीसदी तक गिरे इन कंपनियों के शेयर
सीफूड सेक्टर में कामकाज करने वाली कंपनियों के शेयरों में 11% तक की गिरावट देखी गई। सत्र के दौरान एपेक्स फ्रोजन फूड्स के शेयर की कीमत 11% तक गिर गई। बीएसई पर कंपनी के शेयर 202.90 प्रति शेयर के इंट्राडे लो के साथ खुले जबकि इसका इंट्राडे हाई 225.40 प्रति शेयर रहा।
लक्ष्मीश्री के रिसर्च हेड अंशुल जैन के मुताबिक, एपेक्स फ्रोजन फूड्स के शेयर पिछले 312 दिनों से ₹195-325 के लंबे समय से चल रहे साइडवे रेंज में कारोबार कर रहे हैं।
दूसरी तरह गुरुवार के सत्र में अवंती फीड्स के शेयर के भाव 4% तक गिर गए। सत्र के दौरान कंपनी के शेयर ने 632 रुपये का इंट्राडे हाई और 615 रुपये का इंट्राडे लो बनाया। जैन ने कहा कि अवंती फीड्स जून 2025 में 899 के स्तर से ऊपर अपने ब्रेकआउट को बनाए रखने में विफल रही है। 564 रुपये के सपोर्ट पर पहुंचने तक तत्काल गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
सीफूड्स कंपनियों की आय अमेरिका पर निर्भर!
अवंती फीड्स, एपेक्स फ्रोजन फूड्स और वाटरबेस जैसी समुद्री खाद्य प्रोडक्ट सेक्टर में कामकाज करने वाली कंपनियां अपने राजस्व का 50% से 60% अमेरिकी बाज़ार से प्राप्त करती हैं।
एसबीआई रिसर्च की डॉ. सौम्या कांति घोष के मुताबिक, झींगा निर्यातक जो अपना 50% से ज़्यादा शिपमेंट अमेरिका भेजते हैं, उच्च टैरिफ के लागू होने के कारण होने वाले बड़े नुकसान और संभावित ऑर्डर रद्द होने को लेकर चिंतित हैं। घोष ने कहा कि यह स्थिति अमेरिका में उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को भी प्रभावित करती है और इक्वाडोर जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करती है।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]
More Articles
- US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति
- Q1 Results Today: L&T, HUL और वरुण बेवरेजेस के नतीजों का दिन! जानें किन शेयरों में दिखेगा बड़ा एक्शन
- MV Electrosystems IPO: आज से खुला निवेश का मौका, ₹400-₹425 प्राइस बैंड और जरूरी डिटेल्स
- Godfrey Phillips Share: कमजोर नतीजों से टूटा निवेशकों का भरोसा, शेयर में 8% तक की बड़ी गिरावट
- Indo-MIM IPO अलॉटमेंट: आज जारी हो रहा है स्टेटस, क्या आपको शेयर मिले? ऐसे चेक करें
- Market Strategy: Index नहीं, सही Stocks चुनिए; गिरावट में हो सकती है कमाई!