नयी दिल्ली। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा प्रीपेड प्लान पर चार्जेस बढ़ाये जाने के बाद मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए एक और झटका देने वाली खबर सामने आयी है। टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने 6 पैसे प्रति मिनट के मोबाइल इंटरकनेक्ट यूसेज यानी आईयूसी चार्ज की अवधि एक साल आगे बढ़ा दी है। इसका मतलब है कि आपके द्वारा किसी अन्य नेटवर्क पर कॉल करने पर आपके ऑपरेटर को दूसरे नेटवर्क ऑपरेटर को 6 पैसे प्रति मिनट का आईयूसी शुल्क 31 दिसंबर 2020 तक देना होगा। ट्राई ने एक बयान जारी करके कहा है कि वायरलेस से वायरलेस घरेलू कॉल के लिए टर्मिनेशन शुल्क 31 दिसंबर 2020 तक प्रति मिनट 6 पैसे जारी रहेगा। इसका अर्थ है कि नया बिल ऐंड कीप सिस्टम 1 जनवरी 2021 तक के लिए टाल दिया गया है, जिससे आईयूसी शुल्क शून्य हो जाएंगे। मगर फिलहाल यह सिस्टम भी टल गया है, जिससे कंपनियों को आईयूसी देना होगा।

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कॉल करने पर कंपनी देती हैं शुल्क
मौजूदा नियमों के मुताबिक इंटरकनेक्ट चार्ज, जिसे कॉल टर्मिनेशन चार्ज भी कहा जाता है, का भुगतान जिस ऑपरेटर से कॉल की गयी है उसके द्वारा जिस नेटवर्क पर कॉल की गयी है उस दूरसंचार कंपनी को भुगतान किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि आप जियो के उपभोक्ता हैं और आप वोडाफोन आइडिया के नेटवर्क पर कॉल करें तो जियो वोडाफोन को 6 पैसे प्रति मिनट का आईयूसी शुल्क देगी।

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पहले लगते थे 14 पैसे
पहले आईय़ूसी चार्ज 14 पैसे थे। मगर ट्राई ने 1 अक्टूबर 2017 को आईयूसी शुल्क 14 पैसे से घटा कर 6 पैसा कर दिया था। इसके बाद ट्राई ने कहा था कि 1 जनवरी 2020 से आईयूसी शुल्क शून्य कर दिया जायेगा। मगर अब ट्राई ने अपना यह फैसला 1 साल के लिए टाल दिया है। हालाँकि कंपनियाँ आपस में यह भुगतान एक-दूसरे को करती हैं, मगर एयरटेल और वोडाफोन ने यह शुल्क उपभोक्ताओं से वसूल करना खत्म कर दिया है। पर रिलायंस जियो सीमित मुफ्त मिनटों के ऊपर कॉल करने पर 6 पैसे प्रति मिनट का शुल्क वसूल रही है।

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