RBI Credit Policy: रिजर्व बैंक की मॉनिटरी कमेटी की बैठक के बाद गर्वनर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया है। इस प्रकार से रेपो रेट 6.50 फीसदी पर बनी रहेगी। रेपो रेट पिछले काफी समय से स्थिर बनी हुई है। रिवर्ज बैंक का मानना है कि आर्थिक स्थिति काबू में है।

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आरबीआई एमपीसी की मुख्य बातें

  • रेपो रेट लगातार तीसरी बार 6.50 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा
  • वित्त वर्ष 2024 के लिए जीडीपी अनुमान 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा
  • 2023-24 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत किया गया
  • पॉलसी रुख 'Withdrawal Of Accommodation' पर अपरिवर्तित रहा और एमपीसी के 6 में से 5 सदस्य इस रुख का समर्थन किया
  • एमपीसी मुद्रास्फीति पर नजर रखेगी और मुद्रास्फीति को लक्षित स्तर पर लाने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ रहेगी

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आरबीआई की अन्य महत्वपूर्ण दरें भी अपरिवर्तित रहीं

एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया

स्थायी जमा सुविधा दर को भी 6.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा

सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर भी 6.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा

महंगाई को लेकर अनुमान

रिवर्ज बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 2023-24 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत किया है। तिमाही के हिसाब से आरबीआई का अनुमान नीचे बताया जा रहा है।

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जुलाई-सितंबर 2023 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया गया

अक्टूबर-दिसंबर 2023 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया गया

जनवरी-मार्च 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया

अप्रैल-जून 2024 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 5.2 प्रतिशत आंका गया

जीडीपी पर अनुमान

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का कहना है कि 2023-24 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

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अप्रैल-जून 2023 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 8.0 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

जुलाई-सितंबर 2023 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

अक्टूबर-दिसंबर 2023 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.0 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

जनवरी-मार्च 2024 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 5.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।

अप्रैल-जून 2024 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत आंका गया

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एमपीसी के 6 सदस्य कौन

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के अलावा 4 नॉमित सदस्य हैं। इनके नाम हैं आशिमा गोयल, राजीव रंजन, जयन्त आर. वर्मा और शशांक भिडे।

मोदी सरकार के कार्यकाल में रेपो रेट की हिस्ट्री

मोदी सरकार में रेपो रेट की हिस्ट्री काफी रोचक है। पूरे मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दर कभी उतना नहीं रही जितनी दर ठीक मोदी सरकार के शपथ के ठीक पहले थी। जब मोदी सरकार ने कार्यकाल संभाला तो रेपो रेट की दर 8 फीसदी थी, जो फिर कभी उतनी नहीं हुई है।

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ये है रेपो रेट का सफर

-8 जून 23 को 6.50 फीसदी
-4 अप्रैल 23 को 6.50 फीसदी
-8 फरवरी 23 को 6.50 फीसदी
-7 दिसंबर 22 को 6.25 फीसदी
-30 सितंबर 22 को 5.90 फीसदी
-5 अगस्त 22 को 5.40 फीसदी
-8 जून 22 को 4.90 फीसदी
-4 मई 22 को 4.40 फीसदी
-10 फरवरी 22 को 4 फीसदी
-8 दिसंबर 21 को 4 फीसदी
-8 अक्टूबर 21 को 4 फीसदी
-6 अगस्त 21 को 4 फीसदी
-4 जून 21 को 4 फीसदी
-7 अप्रैल 21 को 4 फीसदी
-5 फरवरी 21 को 4.00 फीसदी
-4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
-9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
-6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
-22 मई 2020 को 4.00 फीसदी
-27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी
-4 अक्टूबर 2019 को 5.15 फीसदी
-7 अगस्त 2019 को 5.40 फीसदी
-6 जून 19 को 5.75 फीसदी
-04 अप्रैल 19 को 6.00 फीसदी
-07 फरवरी 19 को 6.25 फीसदी
-05 दिसंबर 18 को 6.50 फीसदी
-05 अक्टूबर 18 को 6.50 फीसदी
-01 अगस्त 18 को 6.50 फीसदी
-06 जून 18 को 6.25 फीसदी
-05 अप्रैल 18 को 6.00 फीसदी
-07 फरवरी 18 को 6.00 फीसदी
-06 दिसंबर 17 को 6.00 फीसदी
-04 अक्टूबर 17 को 6.00 फीसदी
-02 अगस्त 17 को 6.00 फीसदी
-08 जून 17 को 6.25 फीसदी
-06 अप्रैल 17 को 6.25 फीसदी
-08 फरवरी 17 को 6.25 फीसदी
-07 दिसंबर 16 को 6.25 फीसदी
-04 अक्टूबर 16 को 6.25 फीसदी
-05 अप्रैल 16 को 6.50 फीसदी
-29 सितंबर 15 को 6.75 फीसदी
-02 जनवरी 15 को 7.25 फीसदी
-04 मार्च 15 को 7.50 फीसदी
-15 जनवरी 15 को 7.75 फीसदी

मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

क्या होती है रेपो रेट: रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे, जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह।

क्या होती है रिवर्स रेपो रेट: जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे।

क्या होती है सीआरआर: देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

क्या होती है एसएलआर: जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।