Mineral Blocks Auction: केंद्र सरकार अगले दो हफ्ते के अंदर देश के 20 जरूरी मिनरल ब्लॉक की नीलामी करने जा रही है। इस समय के अंदर बोलियां भी मंगाई जाएंगी। माइनिंग सेक्रेटरी वी कांता राव ने 14 नवंबर यानी मंगलवार को यह जानकारी दी है। इन माइंस में लिथियम और ग्रेफाइट की कई खदानें भी शामिल हैं। भारत सरकार ने पिछले महीने लिथियम और नियोबियम के लिए तीन-तीन प्रतिशत और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए एक प्रतिशत रॉयल्टी दर को मंजूर किया था।

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अहम खनिज उन मिनरल्स को कहा जाता है,जो देश के आर्थिक विकास को बल देने के साथ उसकी सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी माने जाते हैं।

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जबकि पिछले कुछ सालों में पूरी दुनिया की निगाह ग्रीन एनर्जी पर है, ऐसे में भारत सरकार ने भी 2070 तक जीरो कार्बन इमिशन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग बढ़ने की वजह से लिथियम और री जैसे मिनरल्स की डिमांड भी काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है।

आपको बताते चलें की इस समय देश की सिर्फ 10 से 12 कंपनियों के पास महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन और उन्हें प्रोसेस करने की तकनीक है।

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इस नीलामी की नोटिस के बाद एक कार्यशाला भी आयोजित की जानी है। इस कार्यशाला में महत्वपूर्ण खनिजों के खनन तथा उनकी प्रोसेसिंग करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाई जाएगी। ताकि बिना वेस्ट किये इन खनिजों का सही इस्तेमाल किया जा सके।

लिथियम का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने के लिए होता है। बिना लिथियम के कोई भी बैटरी बनाना काफी मुश्किल काम होता है। इसलिए लिथियम इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी बनाने के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल है। इसीलिए लिथियम की सप्लाई की सुरक्षा करना भारत सरकार के लिए काफी जरूरी है और सरकार इसके लिएकई तरीके तलाश रही है। जम्मू कश्मीर में इसी साल की शुरुआत में 59 लाख टन की कैपेसिटी वाला देश का पहला लिथियम भंडार मिला है।

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भारत सरकार ने साल 2019 में खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड का गठन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के इस्तेमाल में आने वाले विदेशी रणनीतिक खनिजों की पहचान करना था। खनिजों की पहचान के बाद यह संस्था उनके अधिग्रहण और प्रोसेसिंग के लिए भी जिम्मेदार होती है।

बढ़ती इकोनॉमी और भारी जनसंख्या वाला देश भारत दुनिया के टॉप ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जकों में से एक है। यह एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि इससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी होती है। इसी बात को ध्यान में रखकर पिछले कुछ समय में भारत ने चिली अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे खनिज से भरपूर कई देशों से रेयर मिनरल्स खरीदने के लिए समझौते किए हैं।

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भारत में आई इलेक्ट्रिक व्हीकल की बूस्ट इसके लिए एक बड़ा कारण है। भारत की जनसंख्या की वजह से यहां इन गाड़ियों की ज्यादा खपत है। जिस वजह से इनकी लिथियम आयन बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले लिथियम, कोबाल्ट और निकाल जैसे दूसरे एलिमेंट्स की मांग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इन खनिजों का इस्तेमाल करके बनाई गई ऊर्जा से प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम हो सकता है, वहीं इससे पेट्रोल और डीजल की खपत में भी काफी कमी आ जाएगी।