आपको बता दें कि दूरसंचार क्षेत्र पर 7.88 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज है और यह 31 अगस्त 2017 के आंकड़ों के अनुसार है। संसद में बुधवार को यह जानकारी दी गई। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद में एक जवाब में कहा कि 31 अगस्त 2017 की अंतर-मंत्रालयी समूह की रिपोर्ट के अनुसार दूरसंचार उद्योग का कुल कर्ज 7.88 लाख करोड़ रुपये है।
बता दें कि इसमें से भारतीय कर्ज कुल 1.77 लाख करोड़ रुपए, विदेशी कर्ज 83,918 करोड़ रुपए और कुल बैंक / एफआईआई कर्ज 2.61 लाख करोड़ रुपए है। बैंक आश्वासन 50,000 करोड़ रुपये है। दूरसंचार विभाग की डेफर्ड स्पेक्ट्रम लायबिलिटीज 2.95 लाख करोड़ रुपये है।
तो वहीं अन्य तीसरे पक्ष की देनदारियां 1.80 लाख करोड़ रुपये हैं। इस तरह से कुल देनदारियां 7.88 लाख करोड़ रुपए की है। इसका जवाब कौशलेन्द्र कुमार, रमेश चंदर कौशिक, राजीव रंजन सिंह, सौगत राय और एल.एस. तेजस्वी सूर्या के अतारांकित प्रश्न पर दिया गया। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार एजीआर लेवी पर ब्याज और जुर्माना बनाने की योजना बना रही है या नहीं।
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जवाब में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भुगतान जमा करने और अनुपालन की रिपोर्ट करने के लिए तीन महीने का समय दिया है।
मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि ब्याज और जुर्माने की माफी का कोई भी प्रस्ताव सरकार की तारीख के अनुसार नहीं है। इसी तरह, समय सीमा बढ़ाने का कोई प्रस्ताव आज तक विचाराधीन नहीं है।
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की समिति ने सेक्टर में तनाव से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठकें कीं।
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