नयी दिल्ली। एनसीएलएटी यानी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने एनसीएलटी के लगभग डेढ़ साल पुराने फैसले को पलटते हुए टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में साइरस मिस्त्री को एक बार फिर नियुक्त करने का आदेश दिया है। एनसीएलएटी ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को गैरकानूनी माना है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सायरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे। रतन टाटा के 2012 में रिटायर होने पर सायरस मिस्त्री टाटा संस के चेयरमैन बने थे।

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टाटा संस-सायरस मिस्त्री मामले की अब तक की घटनाएं इस प्रकार हैं :

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24 अक्टूबर 2016 : टाटा संस ने सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया था। उनकी जगह रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया।
25 अक्टूबर 2016 : मिस्त्री ने टाटा संस के बोर्ड को पत्र लिख कर टाटा के ट्रस्टी द्वारा क्षद्म नियंत्रण का लगाया आरोप।
19 दिसंबर 2016 : मिस्त्री ने टाटा समूह की सभी कंपनियों के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया।
20 दिसंबर 2016 : मिस्त्री ने एनसीएलटी में याचिका दाखिल कर अल्पमत शेयरधारकों के दमन और कुप्रबंधन का आरोप लगाया।
12 जनवरी 2017 : टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन नियुक्त कर दिया।
6 फरवरी 2017 : मिस्त्री को टाटा संस के बोर्ड से भी निदेशक पद से हटाया गया।
21 सितंबर 2017 : टाटा संस के बोर्ड ने प्राइवेट कंपनी बनने की योजना को हरी झंडी दिखायी।
12 जून 2018 : एनसीएलटी ने फैसले के लिए 4 जुलाई की तिथि तय की।
4 जुलाई 2018 : एनसीएलटी ने फैसले की तिथि को बढ़ाकर 9 जुलाई किया।
9 जुलाई 2018 : एनसीएलटी ने मिस्त्री की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन पद से बर्खास्त किए जाने को चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मिस्त्री को बोर्ड से इसलिए हटाया गया, क्योंकि बोर्ड और उसके सदस्यों का उन पर से विश्वास खत्म हो गया था।
18 दिसंबर 2019 : एनसीएलएटी ने टाटा समूह के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में साइरस मिस्त्री को एक बार फिर नियुक्त करने का आदेश दिया।

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