Upcoming IPO : अगर आप आईपीओ में निवेश करते है, तो फिर आज की यह खबर आपके काम की हो सकती है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दो कंपनी आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी और टाटा प्ले कम्पनियों के आईपीओ को फंड को जुटाने के लिए मंजूरी दे दी है।
आइडिया फोर्ज टेक्नोलॉजी जो ड्रोन बनाने वाली कम्पनी हैं और यह कंपनी मुंबई स्थित है। इस कम्पनी ने इस वर्ष फरवरी के महीने में सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर को जमा किया था।
13 अप्रैल को कंपनी ने सेबी से ऑब्जर्वेशन लेटर मिला है। किसी भी कंपनी के लिए आईपीओ को लाने से पहले किसी भी कंपनी के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर को हासिल करना आवश्यक होता है।
आइडिया फोर्ज टेक्नोलॉजी के आईपीओ के तहत 300 करोड़ रु की राशि के फ्रेश शेयर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा 48 लाख 69 हजार शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल के तहत की जाएगी।
नरेश मल्होत्रा, अमरप्रीत सिंह, सुंदरराजन के पंडालगुडी, नंबिराजन शेषाद्री, सुजाता वेमुरी, अग्रवाल ट्रेडमार्ट, एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया, सेलेस्टा कैपिटल, इंडसेज टेक्नोलॉजी वेंचर फंड प्रमोटर के साथ आईपीओ में सेलिंग शेयरधारक होंगे।
इसके साथ ही एएंड इन्वेस्टमेंट एलएलई, क्वालकॉम एशिया पैसिफिक पीटीई लिमिटेड और सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप, प्रमोटर आशीष भट के साथ आईपीओ में सेलिंग शेयरधारक होंगे।
आइडिया फोर्ज आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग कर्ज के भुगतान के लिए करेगी। इसके अलावा कई सारी चीजों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा। जैसे फंड का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल आवश्यकता के लिए, प्रोडक्ट डेवलपमेंट में इन्वेस्ट के लिए और इसके साथ ही सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए भी किया जाएगा।
आइडिया फोर्ज जो मुंबई स्थित कंपनी है। इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी। यह जो कंपनी है यह देश भर में मानव रहित हवाई वाहन बनाने वाली स्वदेशी कंपनी है। इसके लिए ड्रोन सर्विलांस और मैपिंग के लिए एवरेज हर 5 मिनट में उड़ान भरते हैं।
टाटा प्ले जिसका पहले नाम टाटा स्काई था यह कंपनी टाटा ग्रुप की सब्सिडियरी कंपनी है। टाटा प्ले के आईपीओ को भी सेबी की मंजूरी मिली है। देश की टाटा प्ले पहली कंपनी है। जिसने ड्राफ्ट पेपर को दर्ज करने के लिए कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग विकल्प उपयोग किया है।
2022 में दिसंबर के महीने में कंपनी ने आईपीओ के कागजात को हासिल किए थे। कंपनी को 26 अप्रैल को ऑब्जर्वेशन लेटर हासिल हुआ है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्री-फाइलिंग रूट के तहत कंपनी पर आईपीओ को लाने का दबाव नहीं होता है। आमतौर पर जो कंपनियां होती है। इन कंपनियों को सेबी से परमिशन मिलने या फाइनल ऑब्जर्वेशन से 12 महीने के भीतर आईपीओ को लॉन्च करना होता है।
जबकि प्री-फाइलिंग रूट में सेबी के फाइनल कमेंट की डेट से 18 महीने के अंदर आईपीओ को जारी किया जा सकता है। इस रूट में अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस स्टेज तक प्राइमरी इश्यू के साइज को 50 प्रतिशत तक बदलने की फ्लेक्सिबिलिटी भी है।
यह जो आईपीओ होगा यह आईपीओ 2 हजार 500 करोड़ रु का हो सकता है। देश के सबसे बड़े डायरेक्ट टू होम में टाटा प्ले प्लेयर्स में शुमार है।
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