Tata Group: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा बताया गया है कि टाटा ग्रुप एक नया सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस योजना के तहत टाटा ग्रुप 40,000 करोड़ रुपए का बड़ा इन्वेस्टमेंट करने जा रहा है। आपको बताते चलें की इस योजना पर राज्य सरकार के साथ चर्चा सफल रही है और राज्य सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है। हालांकि अंतिम मंजूरी केंद्र सरकार देगी, इसके बाद ही प्रोजेक्ट में आगे कुछ भी हो सकता है। आपको बताते चलें की मोदी सरकार के पास अंतिम मंजूरी के लिए संपर्क किया गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह मंजूरी मिल जाएगी।

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आपको बताते चलें कि टाटा ग्रुप असम में 40,000 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट करके सेमीकंटक्टर प्लांट डालना चाहता है। सरमा ने कहा कि हम अक्सर पूछते रहते हैं कि हमारे यहां आईटी उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक क्यों नहीं आ रहे हैं। हालांकि यह अब बदल रहा है। स्टेट कैबिनेट ने अगस्त के महीने में असम सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्शन की नीति को मंजूरी दी थी।

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असम के मुख्यमंत्री के अनुसार अगर सब कुछ ठीक रहा तो राज्य में बड़े निवेश दिखेंगे जिससे इंडस्ट्रीज के लिए पॉजिटिव माहौल तैयार होगा। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के संपर्क में है और ऐसी उम्मीद है कि 1 से 2 महीने के अंदर केंद्र सरकार द्वारा टाटा के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल जाएगी।

आपको बताते चलें कि इस यूनिट में काम करने के लिए 1000 लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य सरकार से भी संपर्क किया गया है। टाटा ग्रुप के इस कदम से प्रदेश में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे जिससे लोगों की लाइफ स्टाइल बेहतर हो सकती है और बेरोजगारी को दूर करने में काफी हद तक मदद मिल सकती है।

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सरमा ने कहा हे कि हमारे लिए यह बहुत अच्छी बात कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने जागीरोड में एक इलेक्ट्रॉनिक केंद्र स्थापित करने के लिए आवेदन जमा किया है। उन्होंने लगभग 40,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ भारत सरकार को एक प्रपोजल पेश किया है। सरमा के अनुसार टाटा ग्रुप ने सेमीकंडक्टर असेंबली और पैकेजिंग प्लांट के बारे में स्टेट गवरमेंट से बात की है और संतुष्ट होने पर इसे केंद्र के पास भेज दिया गया है। बता दें कि जागीरोड, गुवाहाटी से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर है।

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आपको बताते चलें कि टाटा ग्रुप का यह प्रोजेक्ट आगे आने वाले समय में काफी ज्यादा बढ़ने वाला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सेमीकंडक्टर की मांग दिन पर दिन बढ़ती भी जा रही है। यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार द्वारा लगभग मंजूर किया जा चुका है और अब बस केंद्र सरकार की सहमति मिलना बाकी रह गया है। एक बार केंद्र सरकार की सहमति मिलते ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा और आसपास के कई बेरोजगार युवाओं को नौकरी का अवसर भी मिलेगा।

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असम के लिए भी यह एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है क्योंकि वहां पर अभी तक इंडस्ट्रीज की इतनी मजबूत पकड़ नहीं रही है। एक बार टाटा ग्रुप के आ जाने से यहां पर दूसरी कंपनियों का ध्यान भी जा सकता है, जिससे राज्य के विकास को गति मिल सकती है और वहां की इकोनॉमी को भी फायदा हो सकता है।

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