वित्त मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाली नई केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) और मौजूदा योजनाओं में साफ 'सनसेट क्लॉज' और समयसीमा तय करें। इसका मकसद है कि हर योजना का वित्तीय बोझ, प्रदर्शन और लाभार्थियों तक पहुंच तय हो।

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पूरी जानकारी देने की जरूरत

मंत्रालयों को हर योजना के लिए पिछले पांच वर्षों का बजट बनाम वास्तविक व्यय, केंद्रीय फंड से अंतिम लाभार्थी तक पैसे का फ़्लो और योजना के लिए बनाए गए विशेष पदों की संख्या जैसी जानकारी जमा करनी होगी। इस निर्देश के तहत मंत्रालयों को अपनी रिपोर्ट जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक अपडेट करके प्रस्तुत करनी होगी।

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परफॉर्मेंस मूल्यांकन से योजनाओं में सुधार

अधिकारियों के अनुसार, यह कदम यह देखने के लिए लिया गया है कि कौन से मंत्रालय या विभाग बार-बार अपने खर्च के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर रहे हैं। इससे यह भी पता चलेगा कि फंड की मंजूरी और जारी करने में कितना समय लगता है और कौन-सी योजनाएं प्रभावी तरीके से काम कर रही हैं।

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सनसेट क्लॉज की भूमिका

सनसेट क्लॉज हर योजना में यह सुनिश्चित करता है कि उसकी कार्यक्षमता और परिणाम समय पर मूल्यांकन किए जाएं। इस क्लॉज के जरिए राजकोष पर वित्तीय बोझ का आकलन होता है और योजना के लिए स्पष्ट रोडमैप और डेडलाइन तय होती है। हर पांच साल में इसका मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे योजना के खर्च, लाभ और परिणामों की समीक्षा की जा सके।

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अनावश्यक खर्च कम करने में मदद

इस प्रक्रिया से अनावश्यक या प्रभावहीन योजनाओं को सही तरीके से बंद करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग द्वारा समीक्षा की जाने वाली योजनाओं में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन योजनाओं का थर्ड पार्टी मूल्यांकन हुआ है, मंत्रालयों को अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष भी जमा करने होंगे।

सरकार की मंशा

वित्त मंत्रालय का यह निर्देश यह तय करता है कि केंद्र सरकार की हर योजना पारदर्शी, प्रभावी और लाभार्थियों तक सही समय पर पहुंचे। इस कदम से योजना प्रबंधन में अनुशासन आएगा और फंड का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी तरीके से होगा।