Poonam Gupta Success Story: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पूनम गुप्ता नौकरी के लिए भटक रही थी। तभी पूनम की शादी स्कॉटलैंड के रहने वाले एक एनआरआई से हो गयी थी। पूनम गुप्ता शादी के बाद स्कॉटलैंड चली गयीं। पूनम वह जाकर भी नौकरी के लिए कंपनियों में भटक रही थी।

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उन्हें भटकते-भटकते नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन वहां उन्हें एक बिजनेस आइडिया आ गया। उन्होंने उसी बिजनेस पर काम किया और अपनी खुद की कंपनी शुरू कर दी।

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कौन है पूनम गुप्ता?

नई दिल्ली में जन्मी 47 वर्षीय पूनम गुप्ता की स्कूली शिक्षा दिल्ली में ही हुई, बचपन से ही पूनम पढ़ाई - लिखाई में काफी तेज थी। इसी वजह से उन्हें उनकी मेरिट के आधार पर दिल्ली पब्लिक स्कूल में दाखिला मिला था।

पूनम ने इसके बाद दिल्ली के एक लेडी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एमबीए की डिग्री पूरी की।

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शुरू हुआ नौकरी खोजने का संघर्ष

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वो अपनी पहली नौकरी पाने के लिए काफी संघर्ष कर रही थी। जहां पर भी पूनम नौकरी के लिए आवेदन करती थी। एक्सपीरियंस ना होने के वजह से उनकी एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दी जाती।

इस दौरान पूनम की शादी पुनीत गुप्ता से हो गयी, जो कि स्कॉटलैंड में इंडियन ओरिजिन के फार्मासिस्ट थे और अच्छी खासी जॉब करते थे। पूनम भी पुनीत के साथ स्कॉटलैंड पहुँच गयी, पूनम वहां पर अपने लिए नौकरी खोजने लगी लेकिन किस्मत यहाँ भी पूनम का साथ नहीं दे रही थी, उनकी एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती थी।

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उन्हें एक्सपीरियंस ना होने के कारण निरंतर उनकी ऍप्लिकेशन्स रिजेक्ट हो रही थी। उन्हें इन विभिन्न ऑफिसेस के चक्कर लगा रही थी, उन्होंने देखा कि लगभग दफ्तर में रद्दी का ढेर लगा हुआ था।

पूनम को इस रद्दी के ढेर को देखकर एक आइडिया आया। उन्होंने सोचा कि क्यों न इन रद्दी को रिसाइकल किया जाए और फ्रेस पेपर बनाये जाएं। इसके बाद उन्होंने इस पर काफी रिसर्च की। पूनम को इसी दौरान सरकार की एक योजना के तहत 1 लाख रु की फंडिंग मिल गयी।

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उन्होंने इसके बाद वर्ष 2003 में एक कंपनी शुरू की, इस कंपनी का नाम पीजी पेपर्स रखा। इसमें रद्दी पेपर को रीसायकल किया जाता है और नया बेहतर क्वालिटी के नए पेपर बनाए जाते हैं।

मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, आज उनका कारोबार भारत सहित 60 देशों में फैला हुआ है। इसके साथ ही उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 800 करोड़ रु पहुँच चुका है।

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