Success Story: बिहार के कुडकुरी नामक छोटे से गांव में जहां लड़कियों को पारंपरिक रूप से शिक्षा प्राप्त करने की इजाजत नहीं थी। हालांकि, प्रिया रानी ने सामाजिक मानदंडों को पीछे छोड़ते हुए कड़ी मेहनत जारी रखी।

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कड़ी विरोध के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी और लगन के साथ पढ़ती रही। वहीं उन्होंने यूपीएससी परीक्षा को पास भी कर लिया और आईएएस अधिकारी बनीं।

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उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना किया है लेकिन फिर भी प्रिया रानी पीछे मूड के नहीं देखा और मेहनत के साथ पढ़ाई करती रही और कामियाबी हासिल करी। उनका ये दृढ़ संकल्प प्रिया रानी की मेहनत का प्रमाण है।

प्रिया की कहानी भारत में असामान्य नहीं है, जहां कई लड़कियां अभी भी शिक्षा के लिए बाधाओं का सामना करती हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में नजरिया बदल गया है, फिर भी कई परिवार अपनी बेटियों के अवसरों को सीमित करना जारी रखते हैं। प्रिया का अनुभव शिक्षा में लैंगिक समानता के लिए चल रहे संघर्ष को दर्शाता है।

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परिवार से समर्थन

प्रिया के दादा ने उनकी शिक्षा यात्रा में अहम किरदार निभाया है। गांव वालों के विरोध के बावजूद जो उसकी स्कूली शिक्षा को अस्वीकार करते थे, वे अपनी बात पर अड़े रहे। कुडकुरी में प्रिया के सामने आने वाली परेशानियों को देखते हुए, उन्होंने प्रिया को बेहतर शिक्षा के अवसरों के लिए पटना भेज दिया।

उनके पिता ने भी प्रिया की मेहनत को देखते हुए हमेशा उनका समर्थन किया, उनके प्रोत्साहन से प्रिया ने पटना में किराए के घर में रहते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। परिवार का यह समर्थन उमकी सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।

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सिविल सेवा में आगे बढ़ना

बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग पूरी करने और अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी पाने के बाद प्रिया ने सिविल सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अपनी डिग्री पूरी करने के तुरंत बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हे आखिरकार दूसरे प्रयास में भारतीय रक्षा सेवा में स्थान दिलाया।

हालांकि, IAS अधिकारी बनना उनका आखिरी लक्ष्य था। अपने तीसरे प्रयास में असफल होने के बावजूद प्रिया ने दृढ़ निश्चय किया और अपने चौथे प्रयास में अखिल भारतीय रैंक 69 प्राप्त कर अपना सपना पूरा किया।

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उनका समर्पण और कड़ी मेहनत

प्रिया अपनी सफलता का श्रेय लगातार पढ़ाई और प्रयास को देती हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि रोजाना सुबह 4 बजे उठना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। प्रिया के लिए शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है और किसी के लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी है।

जो गांव वाले कभी प्रिया की शिक्षा का विरोध करते थे, वे अब उसकी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं। उसकी सफलता ने न केवल कुडकुरी बल्कि आस-पास के गांवों में भी लड़कियों की शिक्षा के प्रति नजरिए में बदलाव को प्रेरित किया है।

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प्रिया की उपलब्धियों ने पूरे समाज में बदलाव की चिंगारी जलाई है। उनकी कहानी ने दूसरों को अपनी बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे बड़ा सांस्कृतिक बदलाव हुआ है। पूरा बिहार राज्य प्रिया की उपलब्धियों और उनके द्वारा किए गए अच्छे प्रभाव पर गर्व करता है।