नई दिल्ली, मई 2। अकसर जिन पुरानी चीजों को बेकार समझ कर फेंक दिया जाता है, वो बहुत कीमती होती हैं। कुछ पुरानी चीजें ऐसी भी होती हैं, जिनमें लोग अपनी कीमती वस्तु या पैसे रख कर भूल जाते हैं। जिसके हाथ ये चीजे आ जाएं उसकी मौज हो जाती है। एक ऐसा ही वाकया सामने आया है जर्मनी से, जहां एक पुराने किचन फर्नीचर में एक व्यक्ति को बहुत भारी रकम मिली। एक पुरानी कहावत भी है कि एक आदमी का कचरा दूसरे आदमी का खजाना हो सकता है। ये कहावत जर्मनी के इस शख्स की घटना पर फिट बैठती है। मगर ईमानदारी की मिसाल कायम करते हुए इस शख्स ने पैसा अपने पास रखना ठीक नहीं समझा। जानते हैं पूरी डिटेल।
जर्मनी के थॉमस हेलर ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ईबे पर एक पुराना किचन फर्नीचर खरीदा। उन्हें ये फर्नीचर का पीस केवल 203 पाउंड (19,531 रु) मिल गया। मगर हेलर को इस किचन फर्नीचर में ढर सारा कैश मिला। इस अलमारी जैसे फर्नीचर पीस में से एक कपबोर्ड के अंदर हेलर को दो गुप्त बक्से मिले, जिसमें से एक में उन्हें 1 लाख यूरो से अधिक की रकम मिली।
हेलर को इस फर्नीचर में से कुल 1.30 लाख यूरो मिले, जो भारतीय मुद्रा में 1.05 करोड़ रु होते हैं। मगर हेलर ने लालच के आगे झुकने और कैश को अपनी जेब में रखने के बजाय पुलिस स्टेशन को सौंप दिया। कपबोर्ड में दो एनवलप थे। पहला उन्होंने खोला तो पाया कि उसमें 100 यूरो-यूरो के नोट थे। वे तुरंत इन एनवलप को पुलिस के पास ले गए। पुलिस ने वहां दूसरा एनवलप खोला, जिसमें 200-500 यूरो के नोट थे।
इस राशि और हेलर की ईमानदारी से प्रभावित होकर, पुलिस मामले को जिला अदालत में ले गई और फर्नीचर के असली मालिक को खोजने के लिए जांच शुरू की। बाद में पता चला कि ये पैसा हाले शहर की एक 91 वर्षीय महिला का था, जिन्हें उनके पति के निधन के बाद एक रिटायरमेंट होम में रखा गया था। पुलिस के अनुसार दो कैश बॉक्स फर्नीचर के अच्छी तरह से छिपे हुए थे जिन्हें देखना मुश्किल था।
इस फर्नीचर का विक्रेता वास्तव में बुजुर्ग दंपति का पोता था, जिसने स्थानीय मीडिया को बताया कि उसे अंदर छिपे पैसे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेट्रो.को.यूके की रिपोर्ट के अनुसार जर्मन कानून के तहत, खोआ हुआ धन यदि 10 यूरो से अधिक हो तो इसे रखना गबन माना जाता है, जिसमें अपराधियों को तीन साल तक की जेल का सामना करना पड़ता है।
ऊपर बताए गए कानून के बावजूद हेलर के ईमानदार स्वभाव को पुरस्कृत किया गया क्योंकि इसी कानून में यह भी कहा गया है कि वह अब 3 फीसदी खोजकर्ता शुल्क के लिए पात्र हैं। ये 3.64 लाख रु होते हैं। हेलर ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि वह किस तरह से इस पैसे को खर्च करने की योजना बना रहे हैं। पर उनकी ईमानदारी की खूब चर्चा हुई।
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