Stock Market Update: मार्च का महीना शेयर बाजार के लिए किसी आफत से कम नहीं रहा। महीने की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई और शुरुआती झटकों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। हालंकि बीच-बीच में बाजार ने मजबूती दिखाने की कोशिश की, लेकिन ये तेजी टिक नहीं पाई। अंत तक आते-आते निवेशकों का भरोसा बाजार से पूरी तरह उठता नजर आया।

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वैश्विक संकेतों की कमजोरी, ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर जबरदस्त दबाव बनाए रखा, जिससे प्रमुख इंडेक्स में लगातार गिरावट दर्ज की गई और माहौल पूरी तरह निगेटिव हो गया। अगर पूरे महीने के ट्रेंड पर नजर डालें, तो बाजार में लगातार वोलैटिलिटी बनी रही। कई सेशंस में तेज गिरावट के बाद हल्की रिकवरी भी दिखी, लेकिन यह टिकाऊ नहीं रही।

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Nifty में 10% से ज्यादा की गिरावट-
विदेशी निवेशकों (FII) ने लगातार बिकवाली की, जबकि घरेलू निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की। पूरे एक महीने में प्रमुख इंडेक्सों के परफॉर्मेंस की बात करें तो गिरावट जोरदार देखने को मिली। मार्च के दौरान Nifty 50 में 10.20% की गिरावट रही, Sensex में 10.3% की गिरावट देखी गई, Nifty Bank की बात करें तो इसमें 16% की गिरावट रही, वहीं Nifty Midcap में 9.5% तक की गिरावट दर्ज की गई।

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क्रूड में तेजी से गिरा बाजार-
यह गिरावट साफ तौर पर दिखाती है कि बाजार में दबाव किस हद तक हावी रहा है और निवेशकों का सेंटीमेंट कितना कमजोर पड़ा है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता युद्ध तनाव रहा, जिससे कच्चे तेल (Crude) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। क्रूड महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ी और इसका असर लगभग हर सेक्टर पर पड़ा।

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Nifty Auto में 13% से ज्यादा की गिरावट-
क्रूड की कमी से बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली और ज्यादातर सेक्टर्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर्स में Nifty Auto है, जिसमें 13.7% की गिरावट आई, Nifty Realty में 15.2% की भारी गिरावट दर्ज हुई, और Nifty FMCG में करीब 10% की गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट और भी कमजोर हुआ।

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अप्रैल में बाजार की चाल कैसी-
अब सवाल है कि आगे बाजार की चाल कैसी रहेगी? तो आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। अगर अमेरिकी-ईरान जंग में कमीा आती है और बातचीत से समाधान निकलता है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। वहीं, अगर क्रूड की कीमत ऊंची बनी रहती है तो बाजार में और दबाव आ सकता है।

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लॉन्ग टर्म का रखें नजरिया-
एक्सपर्टस मानते हैं कि शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर के तौर पर देखी जा रही है। सही रणनीति और धैर्य के साथ निवेश करने वाले निवेशक आगे अच्छा रिटर्न पा सकते हैं। क्योंकि मार्केट का इतिहास बताता है कि हर गिरावट के बाद बाजार ने अच्छी छलांग लगाई है।


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