Share Market में आज कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली बढ़ने से बाजार फिसल गया और प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में आ गए।
सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 350 अंकों से ज्यादा उछल गया था, जबकि निफ्टी भी 24,500 के ऊपर निकल गया। लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सेंसेक्स अपने इंट्राडे हाई से करीब 350 अंक टूट गया और निफ्टी भी फिसलकर 24,450 के नीचे आ गया।
तेजी के बाद मुनाफावसूली-
दरअसल, पिछले चार कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार ने शानदार तेजी दिखाई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 2.4 फीसदी तक मजबूत हुए और लगभग 10 हफ्तों के उच्च स्तर पर बंद हुए थे। ऐसे में कई निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। यही वजह रही कि शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और बाजार में बिकवाली बढ़ने लगी।
वीकली एक्सपायरी से बी गिरा बाज़ार-
आज की गिरावट का दूसरा बड़ा कारण निफ्टी की वीकली एक्सपायरी भी रही। एक्सपायरी वाले दिन अक्सर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है क्योंकि ट्रेडर्स अपनी पोजिशन काटते या नई पोजिशन बनाते हैं। इसी वजह से दोपहर तक बाजार में काफी वोलैटिलिटी देखने को मिली।
मेटल और रियल्टी शेयरों ने बनाया दबाव-
अगर सेक्टरवार प्रदर्शन देखें तो मेटल और रियल्टी शेयरों ने बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी टूट गया। सरकारी और निजी बैंकिंग शेयरों में भी हल्की कमजोरी रही, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
IT सेक्टर बाजार के लिए बड़ा सहारा-
हालांकि इस पूरे माहौल में आईटी सेक्टर बाजार के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में ढाई फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को काफी हद तक सीमित रखने में मदद की। अगर आईटी सेक्टर में यह मजबूती नहीं होती, तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती थी।
वैश्विक मोर्चे पर निवेशकों की चिंता बढ़ी-
इसके अलावा वैश्विक मोर्चे पर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। होर्मुज के पास ओमान तट पर एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमले की खबर सामने आई। ईरानी मीडिया के मुताबिक यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के समर्थन से समुद्री रास्ते से गुजर रहा था और चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद उसे निशाना बनाया गया। जिससे बाजार में डर का मौहाल फैल गया।
अब आगे की बात करें तो निवेशकों की नजर अगले कुछ कारोबारी सत्रों में विदेशी बाजारों, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू सेक्टरों की चाल पर रहेगी। अगर वैश्विक माहौल सामान्य रहता है और आईटी सेक्टर की मजबूती जारी रहती है, तो बाजार एक बार फिर रिकवरी की कोशिश कर सकता है। लेकिन फिलहाल ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और बढ़ी हुई वोलैटिलिटी से सावधान रहने की जरूरत है।
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